October 1, 2026

Kushal Dalal Gold: एशियन गेम्स में सोनीपत के कुशल का कमाल, तीरंदाजी में भारत को दिलाया गोल्ड मेडल

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Kushal Dalal Gold: एशियन गेम्स में सोनीपत के कुशल का कमाल, तीरंदाजी में भारत को दिलाया गोल्ड मेडल

एशियन गेम्स में सोनीपत के कुशल का कमाल, तीरंदाजी में भारत को दिलाया गोल्ड मेडल

Kushal Dalal Gold: जापान की धरती पर खेले जा रहे एशियन गेम्स से भारत के लिए बेहद ही फक्र की खबर आई है। तीरंदाजी (आर्चरी) प्रतियोगिता के बुधवार वाले मुकाबले भारतीय खेल इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गए, जब हमारे एथलीटों ने एक ही दिन में चार में से तीन गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। (Sonipat Archer Kushal Dalal) इस शानदार उपलब्धि में हरियाणा के सोनीपत जिले का नाम सबसे ऊपर चमका है। सिवानका गांव के 21 वर्षीय युवा तीरंदाज कुशल दलाल ने कंपाउंड टीम इवेंट में अपनी अचूक निशानेबाजी से देश को स्वर्ण पदक दिलाया।

अत्यधिक वजन से शुरू हुई कहानी: रेसिंग, कुश्ती और बॉक्सिंग से होता हुआ आर्चरी तक का सफर

कुशल के एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचने की दास्तान किसी प्रेरक फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। जब कुशल आठवीं कक्षा में पढ़ते थे, तब गांव के देसी दूध-घी और खान-पान की वजह से उनका वजन काफी बढ़ गया था। (Asian Games Archery Gold India) सेहत की चिंता में माता-पिता उन्हें फिट रखने के लिए ग्राउंड पर रनिंग कराने ले जाने लगे। पिता संदीप दलाल की दिली इच्छा बेटे को पहलवान बनाने की थी, इसलिए उन्होंने दिल्ली के अखाड़े में दाखिला भी करा दिया। हालांकि, पढ़ाई प्रभावित होते देख मां गीता ने उन्हें वापस बुला लिया।

इसके बाद रोहतक में बॉक्सिंग में हाथ आजमाने की सोची गई, लेकिन नन्हे कुशल ने रिंग में बच्चों को देखकर मासूमियत से कहा कि वह किसी को पंच मारकर नुकसान नहीं पहुंचा सकता। दूसरों को चोट न पहुंचाने के इसी कोमल स्वभाव के चलते परिवार ने 2017 में उन्हें तीरंदाजी में उतारने का फैसला किया।

किसान पिता ने 3.50 लाख का धनुष खरीदा, मां ने स्टेडियम में बैठकर पास की सरकारी परीक्षा

आर्चरी बेहद खर्चीला खेल है, लेकिन एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले पिता संदीप दलाल ने बेटे के सपनों के आगे तंगी को आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने अपनी हैसियत से बाहर जाकर बेटे के लिए लगभग 3.50 लाख रुपये का कीमती धनुष और तीर खरीदा। दूसरी ओर, मां गीता दलाल अपने बेटे के साथ रोहतक के सेक्टर-1 में रहने लगीं। रोहतक के राजीव गांधी स्टेडियम में जब कुशल शाम 3 से 7:30 बजे तक तीरंदाजी और फिजिकल ट्रेनिंग करते, तो मां मैदान में बैठकर कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी करती थीं। शादी-ब्याह तक का त्याग करने वाली मां की यह अटूट तपस्या रंग लाई और आज वह खरखौदा मार्केट कमेटी में बतौर सरकारी अकाउंटेंट तैनात हैं।

2018 में पहला मेडल और फिर पोलैंड में डबल धमाका

कुशल के मेडल जीतने का सिलसिला 2018 में आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता (अंडर-14) से शुरू हुआ, जहां उन्होंने अपना पहला गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद ‘खेलो इंडिया’ और हरियाणा सरकार की खेल नीति का फायदा उठाकर कुशल आगे बढ़ते चले गए। साल 2021 में पोलैंड में हुई ‘यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप’ में उन्होंने दो स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख जमाई। (Haryana Player Asian Games)

सब-जूनियर, जूनियर और सीनियर श्रेणियों में 15 से अधिक पदक जीत चुके कुशल का यह सफर बताता है कि अगर परिवार का अटूट साथ हो, तो गांव के मैदान से उठकर दुनिया के सबसे बड़े मंच पर भी परचम लहराया जा सकता है।

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