Breaking: राहुल गांधी से बातचीत के बाद राजा वड़िंग ने पद से इस्तीफा दिया, नए प्रधान के लिए सिंगला का नाम आगे
पंजाब कांग्रेस को मिलेगा नया प्रधान
Raja Warring resigns: पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले बड़ा संगठनात्मक बदलाव हुआ है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का फैसला लिया था और इसके बाद वड़िंग ने इस्तीफा दिया। इस बदलाव की प्रक्रिया कांग्रेस के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट की संगठनात्मक फीडबैक रिपोर्ट के बाद तेज हुई। पायलट ने सितंबर में पंजाब की जिम्मेदारी संभालने के बाद प्रदेश कांग्रेस के नेताओं और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों के साथ बातचीत की थी। रिपोर्ट में सामने आए फीडबैक पर राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल समेत शीर्ष नेताओं के बीच चर्चा हुई। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, हाईकमान की ओर से वड़िंग को नेतृत्व परिवर्तन के फैसले की जानकारी दी गई थी। इसके बाद उन्होंने पद छोड़ दिया। कुछ रिपोर्टों में राहुल गांधी के साथ बातचीत और उन्हें इस्तीफा देने के लिए कहे जाने का भी जिक्र है, लेकिन इस बातचीत की पूरी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।
राजा वड़िंग के बाद अब सबसे बड़ा सवाल नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर है। पूर्व मंत्री और संगरूर के पूर्व सांसद विजयइंदर सिंगला का नाम फिलहाल सबसे आगे बताया जा रहा है। हालांकि हाईकमान ने अभी आधिकारिक तौर पर किसी नाम की घोषणा नहीं की है। सिंगला के अलावा गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह, अमृतसर से सांसद गुरजीत सिंह औजला और राजा सांसी से विधायक सुखबिंदर सिंह सरकारिया के नाम भी चर्चा में हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में इन नेताओं को संभावित दावेदारों में शामिल बताया गया है। विजयइंदर सिंगला कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य और पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर संगठन से जुड़े पद पर भी रहे हैं। वह पंजाब के मालवा क्षेत्र से आते हैं, इसलिए प्रदेश संगठन की कमान के लिए उनके नाम की चर्चा को क्षेत्रीय समीकरणों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
सिंगला बोले- मुझे प्रधान बनाए जाने की जानकारी नहीं
प्रधान पद की चर्चा के बीच विजयइंदर सिंगला ने कहा है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि उन्हें पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें भी मीडिया के जरिए अपने नाम के सबसे आगे होने की जानकारी मिली है। सिंगला के मुताबिक, वह दिल्ली या चंडीगढ़ नहीं जा रहे हैं और अपने विधानसभा क्षेत्र संगरूर में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी उन्हें कोई भी जिम्मेदारी देती है तो वह कार्यकर्ता के तौर पर उसे निभाने के लिए तैयार हैं। इससे साफ है कि फिलहाल सिंगला का नाम चर्चा में होने के बावजूद अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान के स्तर पर होना बाकी है। पार्टी नेतृत्व अगले कुछ दिनों में प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर फैसला कर सकता है।
राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद पंजाब कांग्रेस के भीतर गतिविधियां तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई वरिष्ठ नेता दिल्ली में हैं। हाईकमान अगले कुछ दिनों में पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग गुटों के नेताओं से बातचीत कर नए अध्यक्ष के नाम पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहा है। चन्नी गुट पिछले कई महीनों से पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की मांग करता रहा है। हालांकि चन्नी ने हाल में कहा था कि पार्टी के भीतर नाराजगी दूर हो चुकी है और सभी नेता मिलकर काम करेंगे। नए अध्यक्ष की नियुक्ति का फैसला कब और किसे करना है, यह हाईकमान पर छोड़ने की बात भी उन्होंने कही है। सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम भी प्रदेश अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों में है। हालांकि सितंबर में सचिन पायलट के पंजाब प्रभारी बनने के बाद रंधावा समेत कई नेताओं ने पार्टी के साथ मिलकर काम करने का संकेत दिया था।
जुलाई में वड़िंग को बरकरार रखा था, अब फिर बदला फैसला
पंजाब कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर यह इस साल का दूसरा बड़ा बदलाव है। जुलाई में हाईकमान ने वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बनाए रखने का फैसला किया था। साथ ही चरणजीत सिंह चन्नी को पार्टी की चुनावी रणनीति से जुड़ी अहम जिम्मेदारी दी गई थी और दूसरे नेताओं को भी संगठन में भूमिकाएं देकर अलग-अलग गुटों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हुई थी। हालांकि यह व्यवस्था लंबे समय तक विवाद खत्म नहीं कर सकी। वड़िंग और चन्नी समर्थक नेताओं के बीच संगठन को लेकर मतभेद बने रहे। सितंबर में सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी बनाए जाने के बाद हाईकमान ने संगठन की स्थिति पर नए सिरे से फीडबैक लेना शुरू किया। पायलट ने पंजाब के नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों से मुलाकातें कीं। इसके बाद उनकी रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश कांग्रेस में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
सिंगला के नाम पर क्यों हो सकती है चर्चा
विजयइंदर सिंगला का नाम सामने आने के साथ ही कांग्रेस के भीतर सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा भी शुरू हो गई है। पंजाब कांग्रेस के सामने अध्यक्ष पद के लिए ऐसा चेहरा चुनने की चुनौती है जो अलग-अलग गुटों और क्षेत्रों के नेताओं के साथ संगठन को आगे बढ़ा सके। सिंगला को संभावित विकल्प के तौर पर देखने की एक वजह यह भी बताई जा रही है कि वह मालवा क्षेत्र से आते हैं और पार्टी संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। दूसरी तरफ संभावित दावेदारों में जाट सिख और अन्य सामाजिक समूहों से आने वाले नेता भी शामिल हैं।
2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर भी सामाजिक प्रतिनिधित्व की बहस हुई थी। उस समय सुनील जाखड़ के नाम पर भी चर्चा हुई, लेकिन अंततः चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया। उस घटनाक्रम को लेकर जाखड़ और अन्य नेताओं की अलग-अलग सार्वजनिक टिप्पणियां रही हैं। इसलिए मौजूदा समय में सिंगला के नाम को लेकर होने वाली चर्चा को भी पंजाब के सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि यह अभी केवल राजनीतिक चर्चा और संभावित समीकरणों का हिस्सा है। कांग्रेस हाईकमान ने नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने संगठन एकजुट करने की चुनौती
पंजाब विधानसभा चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं हैं और कांग्रेस हाईकमान के सामने प्रदेश संगठन को एकजुट करने की चुनौती है। पिछले महीनों में अध्यक्ष पद को लेकर खींचतान सार्वजनिक हुई और अलग-अलग गुटों के नेता अपनी पसंद और आपत्तियां सामने रखते रहे। सितंबर में सचिन पायलट की मौजूदगी में चन्नी और वड़िंग एक मंच पर भी नजर आए थे। बाद में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने एकजुट होकर काम करने के संकेत दिए। अब वड़िंग के इस्तीफे के बाद हाईकमान की प्राथमिकता नए अध्यक्ष के नाम पर सहमति बनाने और प्रदेश संगठन को चुनावी मोड में लाने की होगी। अगले कुछ दिनों में दिल्ली में होने वाली बैठकों के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है।
