Haryana Beekeeping Scheme: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, मधुमक्खी पालकों को मिलेगा 6.25 लाख रुपये तक का बीमा कवर
हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, मधुमक्खी पालकों को मिलेगा 6.25 लाख रुपये तक का बीमा कवर
Haryana Beekeeping Scheme: करनाल और कुरुक्षेत्र से लेकर जींद-हिसार तक हरियाणा के मधुमक्खी पालकों के लिए सैर-सपाटे या माइग्रेशन के दौरान होने वाले हादसों का खौफ अब खत्म होगा। अचानक आने वाली बाढ़, खेत में आग लगने, महामारी फैलने या फिर सड़क हादसों में मधुमक्खी की कॉलोनियों और बी-बॉक्स (Mukhyamantri Bagwani Bima Yojana Haryana) के तबाह होने पर अब किसानों की गाढ़ी कमाई नहीं डूबेगी।
हरियाणा सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मधुमक्खी पालन को ‘मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना’ के दायरे में शामिल कर दिया है। इस फैसले से प्रदेश के हजारों मधुमक्खी पालकों को प्राकृतिक आपदाओं और अनपेक्षित दुर्घटनाओं के खिलाफ मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच मिल गया है।
नामात्र का प्रीमियम, 96 फीसदी खर्च उठाएगी सरकार
करनाल के जिला उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने योजना की बारीकियां साझा करते हुए बताया कि उद्यान विभाग द्वारा जारी गाइडलाइंस के मुताबिक प्रत्येक मधुमक्खी कॉलोनी के लिए 1250 रुपये और प्रति बी-बॉक्स के लिए 1250 रुपये की बीमित राशि (Insurance Value) तय की गई है। यानी एक पूरी यूनिट का कुल बीमा मूल्य 2500 रुपये होगा। (Beekeeping Subsidy Haryana) राहत की बात यह है कि किसान को कुल बीमित राशि का महज 4 प्रतिशत प्रीमियम ही चुकाना होगा, जबकि बाकी 96 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी।
गणित के हिसाब से देखें तो एक कॉलोनी के लिए 50 रुपये और एक बॉक्स के लिए 50 रुपये प्रीमियम लगेगा। यानी महज 100 रुपये देकर किसान अपनी एक पूरी यूनिट का बीमा करा सकता है। एक मधुमक्खी पालक अधिकतम 250 कॉलोनियों और 250 बॉक्स (कुल 250 यूनिट) का बीमा करा सकता है, जिससे उसे कुल 6.25 लाख रुपये तक का सुरक्षा कवर मिलेगा। सबसे खास बात यह है कि एक बार प्रीमियम भरने के बाद यह बीमा कवर अगले दो वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
माइग्रेशन के दौरान सड़क दुर्घटना और आगजनी से नुकसान भी कवर
हरियाणा में अक्सर मधुमक्खी पालक फूलों के सीजन के हिसाब से अपने डिब्बों को एक जिले या राज्य से दूसरे हिस्से में गाड़ियों के जरिए ले जाते हैं। इस दौरान सड़क हादसों में बी-बॉक्स टूटने और मक्खियों के मरने का बड़ा जोखिम रहता है। नई नीति के तहत हरियाणा की सीमा के भीतर ट्रांसपोर्टेशन के दौरान सड़क दुर्घटना में हुए नुकसान को भी बीमे के दायरे में रखा गया है।
हालांकि, ऐसे हादसों का क्लेम लेने के लिए पुलिस में दर्ज एफआईआर (FIR) या डीडीआर (DDR) की कॉपी लगाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा बाढ़, जलभराव, खेत की आग और प्राधिकारी द्वारा पुष्ट किसी गंभीर बीमारी/महामारी से हुए नुकसान पर भी क्लेम मिलेगा।
हर बॉक्स का होगा यूनिक BBY नंबर, मौके पर होगा भौतिक सत्यापन
फर्जीवाड़े को रोकने और पारदर्शी प्रक्रिया के लिए बीमा के तहत पंजीकृत प्रत्येक बी-बॉक्स पर एक विशिष्ट ‘BBY नंबर’ (मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना नंबर) अंकित किया जाएगा।
नुकसान की स्थिति में इसी नंबर के जरिए बॉक्स की पहचान की जाएगी। क्लेम मिलते ही उद्यान विभाग के अधिकृत अधिकारी या सर्वेक्षक मौके पर जाकर नुकसान का भौतिक सत्यापन (BBY Portal Haryana Beekeeping) करेंगे। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे समय रहते BBY पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराएं। जब तक ऑनलाइन पोर्टल पूरी तरह अपडेट हो रहा है, तब तक विभाग की ओर से मैनुअल/ऑफलाइन आवेदन भी स्वीकार किए जा रहे हैं।
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