Ishika Sambharwal Hockey Bhiwani: हॉकी स्टार ईशिका संभरवाल का भिवानी में नागरिक अभिनंदन, बोलीं- ‘अब ओलंपिक में लाएंगे गोल्ड’
हॉकी स्टार ईशिका संभरवाल का भिवानी में नागरिक अभिनंदन, बोलीं- 'अब ओलंपिक में लाएंगे गोल्ड'
Ishika Sambharwal Hockey Bhiwani: छोटी काशी के नाम से मशहूर भिवानी की धरती रविवार को एक बार फिर अपनी लाडली बेटी के स्वागत में ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरक उठी। एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम को 44 साल के लंबे इंतजार के बाद ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली स्टार खिलाड़ी ईशिका संभरवाल के भिवानी आगमन पर अभूतपूर्व स्वागत किया गया।
शहर के प्रमुख भगत सिंह चौक पर एकत्र सैकड़ों खेल प्रेमियों, स्थानीय नागरिकों और स्कूली बच्चों ने ईशिका का फूल-मालाओं से नागरिक अभिनंदन किया। इसके बाद उन्हें एक खुली जीप में बैठाकर भव्य ‘विक्ट्री मार्च’ निकाला गया, जिसमें पूरा शहर अपनी बेटी की एक झलक पाने को आतुर दिखा।
‘यह तो बस शुरुआत है, अब ओलंपिक में भारत को दिलाएंगे गोल्ड’
अपनी सरजमीं पर मिले इस असीम प्यार और सम्मान से गदगद ईशिका संभरवाल ने लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अपनों के बीच यह सम्मान पाना किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे भावुक पल होता है। उन्होंने आत्मविश्वास से लबरेज़ लहजे में कहा, “एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने के साथ ही हमारी टीम ने सीधे ओलंपिक का टिकट हासिल कर लिया है। अब पूरा ध्यान ओलंपिक की तैयारियों पर केंद्रित है। मैं वादा करती हूं कि अगले दो सालों में अपनी हर छोटी-बड़ी कमजोरी पर काम करूंगी और हमारी टीम ओलंपिक में भी देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर ही लौटेगी।”
पिता की प्रेरणा और जूनियर से सीनियर तक के कड़े संघर्ष की कहानी
ईशिका ने अपनी इस स्वर्णिम उपलब्धि का श्रेय अपने परिवार और विशेष रूप से अपने पिता वीरेंद्र संभरवाल को दिया। उन्होंने भावुक होकर बताया कि उनके पिता खुद हॉकी कोच रहे हैं और उन्हीं के मार्गदर्शन में उन्होंने मैदान पर पहला कदम रखा था। ईशिका के अनुसार, “पापा ने ही मेरे भीतर हॉकी का जुनून जगाया।
जूनियर स्तर से बेंगलुरु के राष्ट्रीय शिविरों में की गई हाड़-तोड़ा मेहनत और सुबह-शाम के कड़े अभ्यास के दम पर ही आज मैं सीनियर राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन सकी हूं।” उन्होंने युवाओं से कहा कि अगर लगन और निरंतर अभ्यास जारी रखा जाए, तो मंजिल तक पहुंचना असंभव नहीं है।
44 साल बाद रचा इतिहास, टीम वर्क ने आसान की राह
अपने पहले ही एशियन गेम्स को करियर का सबसे बड़ा पड़ाव बताते हुए ईशिका ने कहा कि मैदान पर उतरने से पहले ही पूरी टीम ने ठाण लिया था कि इस बार देश का 44 वर्षों का सूखा खत्म करना है।
सीनियर खिलाड़ियों और मुख्य कोच के बेहतरीन तालमेल ने दबाव को दूर किया और वे निडर होकर अपना स्वाभाविक खेल दिखा सकीं। उन्होंने अपना यह पदक अपने परिजनों के साथ-साथ देश के उन सभी खेल प्रेमियों को समर्पित किया, जिनकी दुआओं के बल पर भारतीय हॉकी आज फिर से विश्व पटल पर अपना परचम लहरा रही है।
