ACB Haryana: हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को आगे बढ़ाते हुए प्रशासनिक अमले में एक बेहद अहम और कड़ा फैसला लिया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए और फिलहाल जमानत पर बाहर चल रहे अधिकारियों व कर्मचारियों को अब किसी भी सूरत में उनके पुराने पद या संवेदनशील स्टेशन पर नहीं टिकने दिया जाएगा। सरकार का यह कदम न्यायिक प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
गवाहों और न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की आशंका पर लगाम
अक्सर यह देखने में आ रहा था कि एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा घूसखोरी के मामलों में दबोचे जाने और कुछ समय बाद जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद भी कई कर्मचारी और अधिकारी अपने पुराने कार्यालयों या उसी स्टेशन पर जमे रहते हैं। शासन के संज्ञान में यह बात आई थी कि ऐसे पदों पर बने रहने से आरोपी अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर शिकायतकर्ता या अभियोजन पक्ष के गवाहों को डराने, धमकाने या उन पर अनुचित दबाव बनाने का प्रयास करते हैं। इससे कोर्ट में चल रहे मुकद्दमे और जांच की निष्पक्षता पर सीधा असर पड़ता है। इसी गंभीर पहलू को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अब नीतिगत बदलाव किया है।
सीमावर्ती जिलों और क्षेत्राधिकार से बाहर होगी तैनाती
विभागीय सतर्कता विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक, ऐसे दागी अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला उनके मूल क्षेत्राधिकार से काफी दूर किसी अन्य स्टेशन पर किया जाएगा। प्रशासनिक नियम यह तय करते हैं कि जहां तक संभव हो सके, इन्हें अपने पुराने कार्यक्षेत्र के आसपास के सीमावर्ती (बॉर्डर) जिलों से भी पूरी तरह बाहर भेजा जाए, ताकि मुकदमे की सुनवाई और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया में किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप न हो सके। वहीं, जो कर्मचारी जिला कैडर के अंतर्गत आते हैं और जिनका ट्रांसफर जिले से बाहर संभव नहीं है, उन्हें उसी जिले के भीतर किसी अन्य अत्यंत दूरस्थ स्टेशन पर स्थानांतरित किया जाएगा।
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