Aniruddhacharya Karnal: तरावड़ी में अनिरुद्धाचार्य का बड़ा बयान, संत रामपाल को बताया ‘आठवां अजूबा’, लगाया विदेशी फंडिंग का आरोप

तरावड़ी में अनिरुद्धाचार्य का बड़ा बयान, संत रामपाल को बताया 'आठवां अजूबा', लगाया विदेशी फंडिंग का आरोप
Aniruddhacharya Karnal: करनाल जिले के ऐतिहासिक कस्बे तरावड़ी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा इन दिनों धार्मिक चर्चाओं के साथ-साथ तीखी बयानबाजी का केंद्र बनी हुई है। कथा के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तरी सत्र में जब श्रद्धालुओं ने सनातन धर्म, संत रामपाल, बलि प्रथा और पारिवारिक विवादों से जुड़े सवाल पूछे, तो प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने खुलकर अपनी बात रखी। संत रामपाल और उनके समर्थकों द्वारा सनातन देवी-देवताओं पर उठाए जाने वाले सवालों के जवाब में अनिरुद्धाचार्य ने उन्हें सीधे तौर पर सनातन का शत्रु करार दिया।
‘क्रिश्चियन फंडिंग से चल रहा है सनातन विरोधी एजेंडा’
कथा के दौरान एक श्रद्धालु ने सवाल उठाया कि संत रामपाल और उनके अनुयायी अक्सर सोशल मीडिया और अपनी सभाओं में भगवान राम, भगवान कृष्ण और भगवान शिव को लेकर अमर्यादित टिप्पणियां करते हैं। श्रद्धालु ने पूछा कि ऐसे लोगों के खिलाफ कानून में क्या प्रावधान हैं और प्रशासन इन पर तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं करता?
इस पर तंज कसते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा, “हमारा सनातन धर्म सबसे श्रेष्ठ है, लेकिन आजकल धरती पर एक ‘आठवां अजूबा’ आया हुआ है। यह लोग और इनके सेवादार हमारे पूज्य देवी-देवताओं के बारे में अनर्गल बातें बोलते हैं।” उन्होंने आगे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीधे तौर पर सनातन का विरोध न कर पाने वाली ताकतें ऐसे लोगों के कंधे पर बंदूक रखकर चला रही हैं। इन्हें विदेशी और क्रिश्चियन संस्थाओं से फंडिंग मिलती है ताकि सनातनी समाज में ही फूट डाली जा सके। महाराज ने लोगों को ऐसे एजेंडे से सतर्क रहने की हिदायत दी।
‘जीव हत्या पाप है, बकरे की जगह अहंकार की दें बलि’
कार्यक्रम में एक अन्य श्रद्धालु ने धार्मिक अनुष्ठानों में बकरे की बलि देने की परंपरा को लेकर मार्गदर्शन मांगा। श्रद्धालु ने पूछा कि क्या बकरे की जगह पेठा, कद्दू या नींबू की बलि दी जा सकती है? इस पर अनिरुद्धाचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्म के नाम पर किसी बेजुबान जीव की हत्या करना पूरी तरह गलत है। यदि वास्तव में बलि ही देनी है, तो इंसान को अपने भीतर छिपे अहंकार, क्रोध और लालच की बलि देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूजा-पाठ में केवल नारियल, कद्दू या फल-फूल अर्पित करना ही शास्त्रों के अनुकूल है।
पारिवारिक जमीन विवाद पर दी सुलह की सलाह
कथा के दौरान एक श्रद्धालु ने अपने घरेलू जमीन विवाद का जिक्र करते हुए बताया कि उसकी मां के नाम दर्ज संपत्ति पर परिवार के अन्य सदस्य जबरन अपना दावा ठोक रहे हैं। इस व्यावहारिक समस्या पर आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि पारिवारिक मामलों को अदालतों और पुलिस-थानों में घसीटने के बजाय आपस में बैठकर सुलझाना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि परिवार के बुजुर्गों की मौजूदगी में बातचीत के जरिए ऐसा रास्ता निकाला जाए जिससे रिश्तों की मर्यादा भी बची रहे और विवाद का सम्मानजनक समाधान हो सके।
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