Illegal PG Narnaul: बिना नक्शा और फायर एनओसी के चल रहे पीजी, आयुर्वेदिक कॉलेज नारनौल के छात्रों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
बिना नक्शा और फायर एनओसी के चल रहे पीजी, आयुर्वेदिक कॉलेज नारनौल के छात्रों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
Illegal PG Narnaul: (धर्मनारायण शर्मा) नारनौल: नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत गांव पटिकरा स्थित बाबा खेतानाथ राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में हॉस्टल की सुविधा न होना विद्यार्थियों के लिए आफत और स्थानीय भू-माफिया के लिए कमाई का जरिया बन गया है। कॉलेज में दूर-दराज से आने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं के पास मजबूरी में आसपास के गांवों और कॉलोनियों में चल रहे निजी पीजी में रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। मांग बढ़ती देख नियमों को ठेंगे पर रखकर कृषि भूमि पर बिना किसी सरकारी अनुमति के दो से तीन मंजिला इमारतें खड़ी कर दी गई हैं, जहां न सुरक्षा के मानक पूरे हैं और न ही आपात स्थिति से निपटने के इंतजाम।
कृषि भूमि पर बने बहुमंजिला भवन, न नक्शा पास न फायर एनओसी
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कॉलेज के आसपास बने ज्यादातर पीजी अवैध रूप से कृषि भूमि पर कब्जा कर या बिना सीएलयू (लैंड यूज चेंज) कराए बनाए गए हैं। खेतों के बीचोबीच खड़ी इन दो-तीन मंजिला इमारतों का न तो नगर परिषद से भवन नक्शा पास कराया गया है और न ही अग्निशमन विभाग से एनओसी ली गई है। मानकों को ताक पर रखकर कमरों की तादाद इतनी बढ़ा दी गई है कि किसी अनहोनी की स्थिति में विद्यार्थियों का बचना मुश्किल हो जाएगा।
संकरे रास्ते और बंद निकास: किसी बड़े हादसे का इंतजार?
कई पीजी भवनों की हालत यह है कि वहां तक जाने वाले रास्ते बेहद संकरे हैं, जहां आपात स्थिति में दमकल की गाड़ी तक नहीं पहुंच सकती। इमारतों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की कोई व्यवस्था नहीं है। बिजली की वायरिंग खुली और असुरक्षित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य दिनों में भले ही यह लापरवाही न दिखे, लेकिन आग लगने या कोई अन्य हादसा होने पर यह लापरवाही मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है।
दूषित भोजन और पेयजल की शिकायतें, संयुक्त जांच की मांग
सुरक्षा मानकों के अलावा इन निजी पीजी में मिलने वाले भोजन और पीने के पानी की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कमरों के साथ मेस चलाने वाले संचालक स्वच्छता के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। दूषित पेयजल और गुणवत्ताहीन भोजन को लेकर छात्र दबी जुबान शिकायतें कर रहे हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नगर परिषद, अग्निशमन, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम बनाकर सभी पीजी का औचक निरीक्षण कराया जाए।
कॉलेज हॉस्टल का निर्माण ही स्थायी समाधान
छात्रों और स्थानीय लोगों का स्पष्ट कहना है कि इस समस्या का एकमात्र और स्थायी समाधान कॉलेज परिसर के भीतर पर्याप्त क्षमता वाले हॉस्टल का निर्माण है। हॉस्टल बनने से छात्रों को सुरक्षित माहौल मिलेगा और अवैध पीजी संचालकों की मनमानी पर लगाम लगेगी। हालांकि, जब तक हॉस्टल नहीं बन जाता, तब तक वर्तमान में चल रहे निजी पीजी को कड़े नियमों के दायरे में लाना बेहद जरूरी है।
ईओ बोले- फाइलों की होगी जांच, अवैध पाए जाने पर जारी होंगे नोटिस
मामले की गंभीरता को लेकर जब नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी (EO) जोगेंद्र सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कॉलेज के आसपास संचालित पीजी भवनों के निर्माण और नक्शों की स्थिति फाइलों की पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की गहनता से जांच की जा रही है। यदि कोई भी पीजी भवन नियमों के विपरीत या बिना स्वीकृत नक्शे के बना पाया गया, तो संबंधित संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी किए जाएंगे।
