Bhiwani Elderly Marathon: “सफलता और फिटनेस का उम्र से कोई लेना-देना नहीं होता, असली खेल तो आपकी इच्छाशक्ति का होता है।” इस कहावत को भिवानी के दो वरिष्ठ नागरिकों ने झज्जर में अपनी फुर्ती और स्टेमिना से सच कर दिखाया। (MET City Jhajjar Marathon) झज्जर की मेट सिटी (Bhiwani Elderly Marathon Runners) में आयोजित हुई इंटरनेशनल हाफ मैराथन में भिवानी के दो बुजुर्ग धावकों ने 21.1 किलोमीटर की कठिन दूरी को दो घंटे से भी कम समय में पूरा कर फिनिश लाइन पार की।
हाफ मैराथन में अपना जलवा बिखेरने वालों में भिवानी के सेक्टर-23 निवासी पूर्व सैनिक श्रीपाल यादव और सेक्टर-13 निवासी सेवानिवृत्त प्रिंसिपल रमेश श्योराण शामिल हैं। दोनों की इस उपलब्धि ने न सिर्फ भिवानी का नाम रोशन किया है, बल्कि युवाओं को भी फिटनेस का एक बड़ा सबक दे दिया है।
60 की उम्र में 5 मिनट 24 सेकंड की स्पीड, 1 घंटे 55 मिनट में पूरी की मैराथन
करीब 60 वर्ष के हो चुके पूर्व सैनिक श्रीपाल यादव ने अपनी अद्भुत फिटनेस का परिचय देते हुए 21.1 किलोमीटर की हाफ मैराथन को महज 1 घंटा 55 मिनट में पूरा कर लिया। (Shreepal Yadav Retired Soldier Bhiwani) पूरी दौड़ के दौरान उनकी औसतन रफ्तार 5 मिनट 24 सेकंड प्रति किलोमीटर रही, जो इस उम्र में अच्छे-अच्छे युवाओं के पसीने छुड़ाने के लिए काफी है।
श्रीपाल यादव ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी अनुशासित दिनचर्या को दिया। उन्होंने बताया कि सेना से रिटायर होने के बाद भी उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा। वे रोजाना सुबह उठकर 10 से 15 किलोमीटर दौड़ने का नियमित अभ्यास करते हैं, जिसकी बदौलत वे आज भी पूरी तरह तंदुरुस्त हैं।
65 के रिटायर्ड प्रिंसिपल ने भी नहीं मानी हार, 1 घंटे 57 मिनट में तय की दूरी
वहीं दूसरी ओर, करीब 65 साल के रिटायर्ड प्रिंसिपल रमेश श्योराण भी किसी से पीछे नहीं रहे। उन्होंने भी अपनी गति और स्टेमिना के संतुलन से 21.1 किलोमीटर की दूरी 1 घंटा 57 मिनट में पूरी कर ली। ट्रैक पर दौड़ते समय दोनों धावकों के चेहरे पर थकान से ज्यादा मंजिल तक पहुंचने का जज्बा नजर आ रहा था।
अपनी उपलब्धि पर बात करते हुए पूर्व सैनिक श्रीपाल यादव ने कहा कि आज के दौर में बीमारियों से दूर रहने के लिए नियमित व्यायाम और अनुशासित जीवन शैली बहुत जरूरी है। उनका मकसद सिर्फ मेडल जीतना नहीं, बल्कि आज की युवा पीढ़ी को नशे और मोबाइल की लत से दूर रखकर खेल व शारीरिक गतिविधियों की ओर आकर्षित करना है।
वहीं, पूर्व प्रिंसिपल रमेश श्योराण (Ramesh Sheoran Retired Principal) ने कहा कि मैराथन जैसी प्रतियोगिताओं में दौड़ना सिर्फ शरीर की नहीं, बल्कि आपकी मानसिक मजबूती की भी परीक्षा होती है। बुजुर्गों की इस तरह की आयोजनों में भागीदारी से समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है कि अगर इरादे बुलंद हों, तो ढलती उम्र कभी आपके कदमों को रोक नहीं सकती।
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