Bhiwani News: भिवानी की मनीषा की मौत को 1 साल पूरा, हत्या या आत्महत्या? सीबीआई जांच के बीच आज गांव में श्रद्धांजलि सभा

भिवानी की मनीषा की मौत को 1 साल पूरा, हत्या या आत्महत्या? सीबीआई जांच के बीच आज गांव में श्रद्धांजलि सभा
Bhiwani News: हरियाणा के भिवानी जिले के छोटे से गांव ढाणी लक्ष्मण की 19 वर्षीय लेडी टीचर मनीषा को दुनिया से रुखसत हुए आज पूरा एक साल बीत गया। प्ले-वे स्कूल में पढ़ाने वाली और नर्सिंग अफसर बनने का सपना देखने वाली मनीषा की मौत आज भी एक अनसुलझा पहेली बनी हुई है। परिवार के लिए सबसे बड़ा दर्द यह है कि वे आज तक नहीं जान पाए कि उनकी बेटी की हत्या हुई थी या उसने आत्महत्या की थी। मनीषा की पहली बरसी पर गुरुवार सुबह गांव में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है, जहां ग्रामीण और परिजन नम आंखों से उसे याद कर रहे हैं।
मामला 11 अगस्त 2025 का है, जब मनीषा संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। दो दिन बाद 13 अगस्त को उसका शव पड़ोसी गांव सिंघानी के खेतों में पड़ा मिला। पुलिस ने शुरुआत में हत्या का मुकदमा दर्ज किया, लेकिन महज पांच दिन बाद 18 अगस्त को मामले को आत्महत्या करार दे दिया। पुलिस की इस जल्दबाजी और थ्योरी पर सवाल उठाते हुए परिजनों ने उग्र आंदोलन शुरू कर दिया। चौतरफा दबाव के बाद शव का तीसरी बार दिल्ली एम्स में पोस्टमार्टम कराया गया और आखिरकार जांच की कमान केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई।
किताबें, कपड़े और पूजा का कोना. परिवार ने संजोकर रखी हैं यादें
मनीषा के घर में आज भी सन्नाटा और मायूसी का माहौल है। पिता संजय अपनी बेटी का जिक्र छिड़ते ही भावुक हो जाते हैं। हरियाणवी लहजे में वे कहते हैं, “न्यूं नहीं बेरा म्हारी छोरी के साथ क्या हुआ था, क्यूकर मरी।” संजय बताते हैं कि मनीषा न केवल खुद पढ़ाई में होनहार थी, बल्कि अपने छोटे भाई-बहनों को भी पढ़ाती थी। खेत में काम करने से लेकर घर की जिम्मेदारियां संभालने तक, वह हर कदम पर पिता का हाथ बंटाती थी।
बेटी की असामयिक मौत के बाद परिजनों ने उसकी यादों को जस का तस संभालकर रखा है। मनीषा की किताबें, उसके कपड़े और घर के एक कोने में बना वह छोटा सा मंदिर, जहां वह रोजाना दीया जलाती थी, आज भी वैसा ही है। परिवार आज भी उसी स्थान पर पूजा-अर्चना करता है। पिता संजय का कहना है कि बेटी को इंसाफ दिलाना ही अब उनके जीवन का एकमात्र मकसद बन गया है।
पदयात्रा, अनशन और दिल्ली के चक्कर: 14 अगस्त की तारीख पर टिकी निगाहें
इंसाफ की लड़ाई में संजय और गांव के लोगों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। खाप पंचायतों से लेकर पैदल मार्च, धरना-प्रदर्शन और अनशन तक किए गए। परिजन दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय के चक्कर भी काटते रहे। संजय का कहना है, “जब तक बेटी को न्याय नहीं मिल जाता, मैं लड़ता रहूंगा। अगर उसे इंसाफ नहीं मिला, तो जिंदगी भर इसका मलाल रहेगा।”
फिलहाल पूरे परिवार और गांव की नजरें 14 अगस्त पर टिकी हैं। परिजनों के मुताबिक, सीबीआई द्वारा पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में स्टेटस रिपोर्ट या चार्जशीट दाखिल किए जाने की उम्मीद है। सीबीआई ने दिल्ली में हत्या की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर अपनी जांच आगे बढ़ाई थी। अब तक सीबीआई की टीम चार-पांच बार गांव का दौरा कर चुकी है और 35 से अधिक संदिग्धों व गवाहों से पूछताछ कर चुकी है। जांच एजेंसी ने स्कूल और नर्सिंग कॉलेज के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले हैं। अब देखना होगा कि अदालत में पेश होने वाली रिपोर्ट से मनीषा की मौत के गहरे रहस्य से पर्दा उठ पाता है या नहीं।
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