Chandigarh Nasha Mukti Yatra: नशे के खिलाफ चंडीगढ़ में जनभागीदारी का संदेश देते हुए पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढञ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने वीरवार को सुबह सेक्टर-10 की लेजर वैली से नशा-मुक्त संकल्प यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। प्रशासक खुद इस यात्रा की कमान को संभाला। नशे के खिलाफ मुहिम को जनआंदोलन बनाने के संकल्प के शहर की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ा। लेजर वैली से शुरू हुई यात्रा तिरंगा पार्क, सेक्टर-17 पहुंचकर संपन्न हुई। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों, एनसीसी-एनएसएस स्वयंसेवकों और शहरवासियों ने इसमें हिस्सा लेकर चंडीगढ़ को नशा-मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया। यात्रा के दौरान नशे के खिलाफ जागरूकता के संदेश गूंजते रहे। स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों की भागीदारी ने अभियान को व्यापक रूप दिया। तिरंगा पार्क पहुंचने पर प्रशासक ने सभी प्रतिभागियों को नशा-मुक्त रहने की शपथ दिलाई।
यात्रा को संबोधित करते हुए गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। इसके लिए परिवार, समाज, नागरिक, सरकारी विभाग, स्वास्थ्य एवं शैक्षणिक संस्थान, एनजीओ और युवाओं को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि नशा-मुक्त समाज के निर्माण में जनभागीदारी सबसे अहम है और इसी से विकसित भारत के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, खेल, कौशल विकास और रोजगार को अपने भविष्य की प्राथमिकता बनाने की अपील की। परिवारों से बच्चों के साथ समय बिताने, उनकी बातें सुनने और उन्हें सकारात्मक दिशा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशा युवा पीढ़ी को कमजोर करने के साथ देश की ताकत और सुरक्षा के लिए भी बड़ी चुनौती है। इसलिए मजबूत और विकसित भारत के लिए नशा-मुक्त समाज जरूरी है।
प्रशासक ने बताया कि चंडीगढ़ पुलिस की ओर से एंटी-ड्रग हेल्पलाइन शुरू की गई है। इस पर नागरिक नशे के इस्तेमाल या तस्करी से जुड़ी जानकारी दे सकते हैं। सूचना देने वाले की पहचान और संपर्क विवरण गोपनीय रखा जाएगा। अभियान के तहत जनजागरूकता बढ़ाने के लिए 5 सितंबर को सुखना लेक पर ड्रग-फ्री चंडीगढ़ वॉक और 20 सितंबर को युवाओं पर केंद्रित विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया जा चुका है।
कटारिया ने कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई का मकसद केवल गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ाना नहीं है। नशे की उपलब्धता रोकने के साथ नए लोगों को इसकी गिरफ्त में आने से बचाना और प्रभावित लोगों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि नशे की चपेट में आए लोगों और उनके परिवारों की पहचान के लिए घर-घर सर्वे किया जा रहा है। जरूरतमंदों को काउंसलिंग, इलाज, पुनर्वास और स्किल ट्रेनिंग उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि युवाओं को दोबारा मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। उन्होंने बताया कि माय भारत युवा कनेक्ट : नशा मुक्त अभियान के तहत पंजाब और चंडीगढ़ के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ मिलकर विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्वयंसेवकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 2 अगस्त को शुरू किए गए 100 सप्ताह के विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा अभियान से भी इस मुहिम को गति मिली है। कटारिया ने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा, खेल, कौशल विकास और रोजगार को अपने भविष्य की नींव बनाएं। साथ ही, उन्होंने परिवारों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों के साथ समय बिताएं, उनकी बातें सुनें और उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि नशा हमारी युवा पीढ़ी और आने वाले कल को कमजोर करता है तथा देश की ताकत और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है; इसलिए एक मजबूत और विकसित देश के निर्माण के लिए नशा-मुक्त भारत बेहद जरूरी है।
यात्रा में राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू, चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी, मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद, राज्यपाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव विवेक प्रताप सिंह, गृह सचिव मनदीप सिंह बराड़, डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा, वित्त सचिव दीप्रवा लाकड़ा, शिक्षा सचिव प्रेरणा पुरी और उपायुक्त निशांत कुमार यादव सहित प्रशासन, नगर निगम और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यात्रा के समापन पर नागरिकों, शिक्षण संस्थानों, सरकारी एजेंसियों और सामाजिक संगठनों से नशे के खिलाफ मिलकर अभियान को आगे बढ़ाने की अपील की गई।
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