Chandigarh News: चंडीगढ़ में अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार में देरी पर कानूनी नोटिस, 40 दिन बाद जारी हुई पहचान की सूचना

चंडीगढ़ में अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार में देरी पर कानूनी नोटिस
Chandigarh News: चंडीगढ़ में अज्ञात शवों की पहचान और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में कथित देरी को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील एचसी अरोड़ा ने चंडीगढ़ प्रशासन और पुलिस को कानूनी नोटिस भेजा है। 9 अगस्त को भेजे गए नोटिस में उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में शव मिलने के कई दिन बाद तक पहचान के लिए सार्वजनिक सूचना जारी नहीं की गई। उनका कहना है कि इससे शवों को लंबे समय तक रखने और अंतिम संस्कार में देरी की स्थिति बन रही है।
एचसी अरोड़ा ने चंडीगढ़ के प्रशासक और एसएसपी से मांग की है कि अज्ञात शव मिलने के बाद पहचान के प्रयास, पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जाए। उन्होंने यह प्रक्रिया सात दिन के भीतर पूरी करने की मांग रखी है। नोटिस में चंडीगढ़ पुलिस की ओर से प्रकाशित सार्वजनिक सूचनाओं का तुलनात्मक विवरण भी दिया गया है।
छह मामलों का रिकॉर्ड देकर देरी पर सवाल
नोटिस में चंडीगढ़ पुलिस की ओर से समाचार पत्रों में प्रकाशित छह सार्वजनिक सूचनाओं का हवाला दिया गया है। इनमें शव मिलने की तारीख और पहचान के लिए सूचना प्रकाशित होने की तारीख के बीच 7 से 18 दिन तक का अंतर बताया गया है।
नोटिस के मुताबिक, 24 जनवरी को जीएमएसएच-32 के पास करीब 51 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था। पहचान के लिए सार्वजनिक सूचना 6 फरवरी को प्रकाशित हुई, यानी शव मिलने के करीब 13 दिन बाद।
इसी तरह 6 फरवरी को मिले करीब 55 वर्षीय व्यक्ति के शव की पहचान के लिए सूचना 17 फरवरी को प्रकाशित हुई। 31 मार्च को मिले करीब 35 वर्षीय व्यक्ति के शव की पहचान संबंधी सूचना 18 अप्रैल को जारी की गई।
एक मामले में करीब 40 दिन बाद आई पहचान की सूचना
नोटिस में 16 मार्च को मिले करीब 38 वर्षीय व्यक्ति के शव का मामला भी उठाया गया है। उसकी पहचान के लिए सार्वजनिक सूचना 25 अप्रैल को प्रकाशित हुई थी। यानी दोनों तारीखों के बीच करीब 40 दिन का अंतर था।
इसी तरह 20 अप्रैल को मिले करीब 45 वर्षीय व्यक्ति के शव की पहचान के लिए सूचना 1 मई को जारी होने का उल्लेख नोटिस में किया गया है। 14 मई को मिले करीब 35 वर्षीय व्यक्ति के शव की सूचना 20 मई को प्रकाशित हुई थी।
एचसी अरोड़ा ने इन मामलों के आधार पर सवाल उठाया है कि अज्ञात शव मिलने के बाद पहचान के लिए सार्वजनिक सूचना जारी करने में इतना समय क्यों लग रहा है। उनके मुताबिक, पहचान के प्रयास जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए कोई स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया होनी चाहिए।
सूचना जारी होने के बाद भी इंतजार का आरोप
नोटिस में कहा गया है कि पहचान के लिए सार्वजनिक सूचना जारी होने के बाद भी पुलिस कुछ समय तक संभावित पहचान का इंतजार करती है। ऐसे में शव मिलने से लेकर अंतिम संस्कार तक की पूरी प्रक्रिया कई मामलों में दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खिंच सकती है।
अरोड़ा ने यह भी कहा है कि शव को लंबे समय तक रखने से उसकी स्थिति खराब होने का खतरा रहता है। सड़न और दुर्गंध बढ़ने के साथ पहचान की प्रक्रिया भी मुश्किल हो सकती है। इसलिए पहचान के लिए शुरुआती स्तर पर ही तेजी से प्रयास करने की जरूरत है।
पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार भी समयबद्ध करने की मांग
कानूनी नोटिस में अज्ञात शव मिलने के बाद पहचान के प्रयासों के साथ पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार को भी तय समय में पूरा करने की मांग की गई है। अरोड़ा का कहना है कि जब किसी शव की पहचान तत्काल नहीं हो पाती, तब भी उसे लंबे समय तक रखने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने अपने नोटिस में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के निर्देशों का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि अज्ञात शवों की पहचान के लिए प्रभावी प्रयास किए जाने चाहिए और पोस्टमार्टम तथा अंतिम संस्कार में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
सात दिन की समयसीमा तय करने की मांग
एचसी अरोड़ा ने चंडीगढ़ प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि अज्ञात शव मिलने से लेकर पहचान के प्रयास, पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार तक की पूरी प्रक्रिया के लिए सात दिन की समयसीमा तय की जाए।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर व्यवस्था में सुधार के लिए जरूरी निर्देश जारी नहीं किए गए तो वह पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे।
मामला केवल अंतिम संस्कार में देरी तक सीमित नहीं है। नोटिस में उठाए गए सवाल पुलिस की पूरी प्रक्रिया से जुड़े हैं—शव मिलने के बाद रिकॉर्ड तैयार करने, पहचान के प्रयास करने, सार्वजनिक सूचना जारी करने, पोस्टमार्टम कराने और अंत में अंतिम संस्कार तक हर चरण को समयबद्ध करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
