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चंडीगढ़ के आठ सेक्टरों में अब बिजली की तारों का जाल खत्म, 18 किमी लाइनें हुईं अंडरग्राउंड

चंडीगढ़ के आठ सेक्टरों में अब बिजली की तारों का जाल खत्म, 18 किमी लाइनें हुईं अंडरग्राउंड

चंडीगढ़ के आठ सेक्टरों में अब बिजली की तारों का जाल खत्म

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VVinita Kohliकंटेंट क्रेडिट: जगमार्ग रिपोर्टर- मयंक मिश्रा

Chandigarh power lines: शहर के उत्तरी सेक्टरों में बिजली आपूर्ति को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सेक्टर-1 से 8 तक 11 केवी की करीब 18 किलोमीटर लंबी ओवरहेड बिजली लाइनों को अंडरग्राउंड केबल नेटवर्क में तब्दील कर दिया गया है। करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना से 25 हजार से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने रविवार को परियोजना का उद्घाटन किया। इस दौरान भाजपा नेता संजय टंडन भी मौजूद रहे। इस नेटवर्क की खासियत यह है कि किसी एक फीडर में तकनीकी खराबी आने पर बिजली आपूर्ति लंबे समय तक ठप नहीं रहेगी। सेक्टर-18 स्थित सीपीडीएल के कमांड सेंटर से रिमोट सिस्टम के जरिये बिजली का लोड दूसरे फीडर पर स्थानांतरित किया जा सकेगा। इससे खराबी वाले हिस्से को अलग कर शेष क्षेत्र में बिजली आपूर्ति जल्द बहाल करने में मदद मिलेगी।

परियोजना से सेक्टर-1 से 8 तक के आवासीय क्षेत्रों के अलावा पंजाब एवं हरियाणा सिविल सचिवालय, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, रॉक गार्डन और सुखना लेक जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों और पर्यटन स्थलों को लाभ मिलेगा। खास तौर पर संवेदनशील सरकारी संस्थानों में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी। परियोजना के तहत वन क्षेत्र से गुजरने वाले चार वितरण फीडरों पर 14 स्काडा नियंत्रित रिंग मेन यूनिट (आरएमयू) भी स्थापित की गई हैं। इनके संचालन की सुविधा कमांड सेंटर से उपलब्ध होगी। इससे बिजली नेटवर्क की निगरानी और खराबी की स्थिति में आपूर्ति बहाल करने की प्रक्रिया तेज होगी।

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सीपीडीएल के सीईओ ब्रजेश कुमार ने कहा कि 18 किलोमीटर अंडरग्राउंड नेटवर्क की यह परियोजना शहर की बिजली व्यवस्था के आधुनिकीकरण की व्यापक योजना का हिस्सा है। सीपीडीएल ने अगले पांच वर्षों में विद्युत नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 956 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है। इसमें नेटवर्क सुधार, बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने, स्मार्ट मीटरिंग, सुरक्षा और डिजिटल तकनीक से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक नेटवर्क से शहर की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी और उपभोक्ताओं को ज्यादा सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जा सकेगी। परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान वन क्षेत्र से गुजरने वाले हिस्सों में काम करना चुनौतीपूर्ण रहा। इसके अलावा वैधानिक मंजूरियां और सुरक्षा संबंधी प्रतिबंध भी थे। इन चुनौतियों के बावजूद सीपीडीएल ने निर्धारित सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के तहत परियोजना को पूरा किया।

 

आंधी-तूफान में टूटने वाली लाइनों से मिलेगी निजात

प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि ओवरहेड बिजली लाइनें तेज हवाओं, तूफान और पेड़ों के गिरने से अक्सर प्रभावित होती हैं। ऐसी स्थिति में किसी एक जगह की खराबी का असर बड़े क्षेत्र की बिजली आपूर्ति पर पड़ सकता है। भूमिगत नेटवर्क से इन जोखिमों को काफी कम किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि आज अस्पताल, स्कूल और घर—सभी के लिए निर्बाध बिजली जरूरी है। बिजली नेटवर्क को भूमिगत करने से आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होने के साथ शहर की खूबसूरती भी बढ़ेगी। रॉक गार्डन और सुखना झील के आसपास खंभों और तारों का जाल कम होने से क्षेत्र का स्वरूप भी बेहतर होगा। इससे ओवरहेड तारों से पक्षियों और वन्यजीवों को होने वाला खतरा भी कम होगा।

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