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Child Protection Campaign: नीलोखेड़ी और निसिंग के गांवों में बाल शोषण के खिलाफ बड़ी मुहिम, मैदान में उतरीं सामाजिक संस्थाएं

Child Protection Campaign: नीलोखेड़ी और निसिंग के गांवों में बाल शोषण के खिलाफ बड़ी मुहिम, मैदान में उतरीं सामाजिक संस्थाएं

सावधान! बच्चों से मजदूरी या बाल विवाह कराया तो खैर नहीं

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GGaganpreet Kaurकंटेंट क्रेडिट: नीलोखेड़ी(महाबीर मैहला)

Child Protection Campaign: बचपन को सुरक्षित और शोषणमुक्त बनाने के दावे तो अक्सर कागजों पर खूब दिखते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बदलने के लिए जब सामाजिक संस्थाएं और ग्रामीण खुद उठ खड़े हों, तो बदलाव की बयार साफ महसूस होने लगती है। कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों नीलोखेड़ी और निसिंग के ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रहा है। ‘एमडीडी ऑफ इंडिया’ और ‘जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रेन’ संस्था ने संयुक्त रूप से इस पूरे क्षेत्र में बाल संरक्षण अभियान को नए सिरे से तेज कर दिया है। संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सुरेंद्र सिंह मान की देखरेख में चल रही इस मुहिम का सीधा असर अब गांवों की चौपालों और गलियों में दिखने लगा है।

हर दरवाजे तक पहुंच रही आवाज: बाल विवाह और मजदूरी कानूनन जुर्म

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इस अभियान के तहत सामाजिक कार्यकर्ता महाबीर मैहला लगातार फील्ड में डटे हुए हैं। वे एक-एक गांव का दौरा कर न सिर्फ लोगों को इकट्ठा कर रहे हैं, बल्कि उन्हें बच्चों के मौलिक अधिकारों, शिक्षा के महत्व और उनकी सुरक्षा को लेकर संवेदनशील बना रहे हैं।

ग्रामीणों के बीच संवाद करते हुए महाबीर मैहला ने दोटूक शब्दों में कहा कि बाल विवाह, जबरन बाल मजदूरी और बच्चों के साथ होने वाला किसी भी तरह का दुर्व्यवहार या यौन शोषण सिर्फ सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि संगीन कानूनी अपराध है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब तक समाज का हर नागरिक अपनी आंखें खुली नहीं रखेगा, तब तक मासूमों का बचपन सुरक्षित नहीं किया जा सकता।

सरपंचों से लेकर आशा वर्कर्स तक, एक मंच पर आया पूरा अमला

इस अभियान की सबसे बड़ी खूबसूरती इसका जमीनी नेटवर्क है। गांवों में बच्चों की सुरक्षा को केवल संस्था के भरोसे नहीं छोड़ा गया है, बल्कि इसमें स्थानीय स्तर पर एक चेन बनाई गई है। गांवों के मौजूदा सरपंच, स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी एएनएम, आंगनवाड़ी सुपरवाइजर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर्स और ग्राम बाल संरक्षण समितियों (VCPC) को इस मिशन में सक्रिय साझेदार बनाया गया है।

ये सभी विभाग आपस में हर छोटी-बड़ी जानकारी साझा कर रहे हैं ताकि किसी भी संकटग्रस्त या जरूरतमंद बच्चे की पहचान कर उसे तुरंत सरकारी योजनाओं और कानूनी मदद का लाभ दिलाया जा सके।

चुप्पी तोड़िए और सूचना दीजिए: सुरेंद्र सिंह मान

संस्था के मुखिया सुरेंद्र सिंह मान ने इस मुहिम की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि बच्चों को एक सुरक्षित माहौल और अच्छी शिक्षा देना किसी एक विभाग का नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक कर्तव्य है। उन्होंने ग्रामीणों से मुखातिब होते हुए कहा, “यदि आपको अपने आसपास कहीं भी बाल विवाह की तैयारी, ढाबों या खेतों में बच्चों से मजदूरी कराने या उनके साथ किसी भी तरह के दुर्व्यवहार की भनक लगती है, तो चुप मत बैठिए। इसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों या संस्था को दें, ताकि वक्त रहते किसी मासूम की जिंदगी को खराब होने से बचाया जा सके।”

वहीं, महाबीर मैहला ने बताया कि नीलोखेड़ी और निसिंग के कई गांवों में जो बाल संरक्षण समितियां पहले निष्क्रिय पड़ी थीं, उन्हें दोबारा पुनर्गठित कर अमली जामा पहनाया जा रहा है। ये समितियां अब गांवों में एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेंगी, जिनकी पैनी नजर बच्चों से जुड़े हर मामले पर रहेगी। साफ है कि जब जनसहभागिता और सरकारी तंत्र एक सुर में काम करेंगे, तभी एक शोषणमुक्त और शिक्षित समाज का सपना साकार हो सकेगा।

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