Corporate Career Tips: ऑफिस में देर तक बैठना नहीं है सफलता की गारंटी, जानें क्या है करियर में प्रमोशन का असली सीक्रेट

ऑफिस में देर तक बैठना नहीं है सफलता की गारंटी, जानें क्या है करियर में प्रमोशन का असली सीक्रेट
Corporate Career Tips: कॉर्पोरेट जगत में लंबे समय से यह धारणा हावी रही है कि जो कर्मचारी ऑफिस में सबसे देर तक रुकता है, हर समय फाइलों में उलझा दिखता है और अपनी थकान की परवाह किए बिना काम करता है, वही सबसे ज्यादा लगनशील है। अक्सर माना जाता है कि ऐसा करने से करियर में तेजी से ग्रोथ मिलती है।
हालांकि, आधुनिक वर्क कल्चर में अब इस पुरानी सोच पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का साफ मानना है कि ऑफिस में ज्यादा घंटे बैठने से करियर में तरक्की की गारंटी नहीं मिलती। असल फर्क इस बात से पड़ता है कि आप अपने काम की गुणवत्ता और फैसलों से अपनी टीम व बॉस के बीच कितना भरोसा कायम करते हैं।
‘सिर्फ व्यस्त दिखना काफी नहीं’: एक्सपर्ट फ्रियाज श्रॉफ का संदेश
हाल ही में इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में कॉर्पोरेट ट्रेनर फ्रियाज श्रॉफ (Freyaz Shroff) ने दफ्तर में कर्मचारियों की इस मानसिकता पर बेबाक राय रखी है। उनका कहना है कि किसी कर्मचारी की असली पहचान उसके काम के घंटों की गिनती से नहीं, बल्कि उसके दिए गए नतीजों से होती है।
श्रॉफ के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति रोजाना 10 या 12 घंटे मेज पर बिताता है, लेकिन तय समय सीमा में सटीक आउटपुट नहीं दे पाता, तो उसकी केवल कागजी मेहनत करियर को आगे नहीं ले जा सकती। करियर की शुरुआत में युवा अक्सर खुद को साबित करने के चक्कर में थकान को नजरअंदाज कर ओवरटाइम करते हैं, जबकि ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि उनके काम से बिजनेस को क्या वैल्यू मिल रही है।
प्रमोशन और बड़ी जिम्मेदारी का आधार: भरोसेमंद कर्मचारी बनना
काम के माहौल में सबसे अहम संपत्ति ‘विश्वसनीयता’ है। फ्रियाज श्रॉफ का तर्क है कि अगर आपका बॉस यह जानता है कि आपको कोई जिम्मेदारी देने के बाद बेफिक्र रहा जा सकता है, आप काम तय डेडलाइन पर पूरा कर लेंगे और किसी अड़चन के आने पर उसे छुपाने के बजाय साफ-साफ फीडबैक देंगे—तो आपकी वैल्यू अपने आप बढ़ जाती है।
हर कदम पर गाइडेंस मांगने के बजाय समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालना और मिले हुए फीडबैक पर काम करके खुद में सुधार करना ही पेशेवर पहचान बनाता है। यही भरोसा आगे चलकर बड़े पदों और इंक्रीमेंट का रास्ता साफ करता है।
सोशल मीडिया पर मिला समर्थन, स्मार्ट वर्क पर जोर
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फ्रियाज श्रॉफ की इस सीख से सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में पेशेवर लोग और युवा सहमत नजर आ रहे हैं। कई यूज़र्स ने इसे वर्कप्लेस की कठिन लेकिन बेहद जरूरी सच्चाई करार दिया। लोगों का कहना है कि सिर्फ थक जाना या खुद को बर्नआउट कर लेना सफलता का सूचक नहीं है।
दफ्तर में आपकी वास्तविक पहचान इस बात से तय होती है कि आप मुश्किल हालात में कैसे फैसले लेते हैं, कितना पारदर्शी संवाद रखते हैं और संस्थान आपको कितनी बड़ी चुनौती सौंपने के लिए तैयार है। संक्षेप में कहें तो घंटों की गिनती भूलकर स्मार्ट वर्क और भरोसेमंद बनने की दिशा में कदम बढ़ाना ही लंबे करियर का असली फॉर्मूला है।
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