September 9, 2026

Faridkot Farmers Protest से पहले डल्लेवाल सहित कई नेताओं को पुलिस ने किया हाउस अरेस्ट

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Faridkot Farmers Protest से पहले डल्लेवाल सहित कई नेताओं को पुलिस ने किया हाउस अरेस्ट

Faridkot Farmers Protest से पहले डल्लेवाल सहित कई नेताओं को पुलिस ने किया हाउस अरेस्ट

Faridkot Farmers Protest :  पंजाब में एक बार फिर राज्य सरकार और किसान संगठन आमने-सामने आ गए हैं।Faridkot में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय प्रदर्शन से ठीक पहले बुधवार तड़के पंजाब पुलिस ने कई जिलों में ताबड़तोड़ छापेमारी की। पुलिस ने भारतीय किसान यूनियन (डल्लेवाल) के शीर्ष नेतृत्व समेत दर्जनों किसान नेताओं को उनके ही घरों में नजरबंद कर दिया, जबकि कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया है। इस पुलिसिया कार्रवाई के बाद अमृतसर से लेकर मालवा तक किसानों में भारी रोष देखा जा रहा है।

दरअसल, बीकेयू डल्लेवाल की ओर से आज Faridkot स्थित प्रमुख बैंक के बाहर एक विशाल राज्य स्तरीय धरने का ऐलान किया गया था। यह प्रदर्शन किसानों के संपूर्ण कर्जमाफी और बैंकों के साथ ‘वन टाइम सेटलमेंट’ (OTS) नीति को पूरी पारदर्शिता से लागू करने की मांग को लेकर आयोजित किया जाना था। लेकिन इससे पहले कि किसान नेता फरीदकोट के लिए रवाना हो पाते, पुलिस प्रशासन ने उन्हें उनके घरों पर ही घेर लिया।

सुबह-सुबह तड़के दबिश, अमृतसर से फिरोजपुर तक घेराबंदी

अमृतसर देहात के सीमावर्ती इलाकों के साथ-साथ तरनतारन, पट्टी, हरिके, Faridkot और फिरोजपुर में सुबह-सुबह भारी पुलिस बल किसान नेताओं के आवासों पर पहुंचा। अमृतसर और उसके आसपास के इलाकों से कई प्रमुख किसान चेहरों को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया गया है।

नजरबंद और हिरासत में लिए गए प्रमुख नेताओं में काका सिंह कोटड़ा, बीकेयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल, बोहड़ सिंह और दीप मंड़ी शामिल हैं। कई इलाकों में तो किसान कार्यकर्ताओं को पुलिस ने सीधे हिरासत में लेकर स्थानीय थानों में भेज दिया है, ताकि वे फरीदकोट न पहुंच सकें।

‘लाठियों और नजरबंदी से नहीं रुकेगा संघर्ष’—डल्लेवाल

अपने आवास पर नजरबंद किए जाने के बाद किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सरकार पुलिस के दम पर किसानों की आवाज दबाना चाहती है।

डल्लेवाल ने सख्त लहजे में चेतावनी दी, “सरकार यह गलतफहमी निकाल दे कि ऐसी धरपकड़ से हमारा आंदोलन रुक जाएगा। किसानों को कर्ज के दलदल से निकालने और बैंकों की तानाशाही खत्म कराने के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। अगर सरकार का यही रवैया रहा, तो हम भूख हड़ताल से लेकर आमरण अनशन तक का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे।”

किसान संगठनों का आरोप: आवाज दबाने की कोशिश

विभिन्न किसान संगठनों ने पुलिसिया कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। नेताओं का आरोप है कि पंजाब सरकार फरीदकोट में होने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शन से घबरा गई थी, इसीलिए राज्यभर में पुलिस को आगे करके किसान नेताओं को घरों से निकलने से रोका जा रहा है। किसानों का कहना है कि उनकी मांगें किसी एक समूह की नहीं, बल्कि पंजाब के लाखों कर्जदार किसानों के भविष्य से जुड़ी हुई हैं।

फिलहाल, अमृतसर समेत पूरे पंजाब में किसान नेताओं की नजरबंदी के बाद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस की इस अप्रत्याशित कार्रवाई के बाद किसान यूनियनों के शीर्ष नेता गुप्त स्थानों पर आपात बैठकें कर रहे हैं, जिससे आने वाले घंटों में किसी बड़े विरोध-प्रदर्शन की रणनीति सामने आ सकती है।

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