Harsimrat Kaur Badal | NCW | पंजाब की राजनीति में 5 करोड़ रुपये की कथित रिश्वतखोरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत मान पर लगे इन संगीन आरोपों को लेकर अब शिरोमणि अकाली दल की वरिष्ठ नेता और बठिंडा से सांसद Harsimrat Kaur Badal ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को नई दिल्ली में उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की चेयरपर्सन विजया किशोर रहाटकर से मुलाकात कर इस पूरे प्रकरण में त्वरित और सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई।
महिला आयोग की अध्यक्ष से मुलाकात के दौरान अकाली सांसद ने पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने आयोग के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखते हुए स्पष्ट किया कि जब तक निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक मुख्यमंत्री को अपने पद पर रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
अकाली दल ने उठाईं तीन मुख्य मांगें
Harsimrat Kaur Badal ने राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष मामले को उठाते हुए पहली मांग यह रखी कि मुख्यमंत्री भगवंत मान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। इसके साथ ही उन्होंने डॉ. गुरप्रीत मान के खिलाफ बिना किसी देरी के एफआईआर दर्ज करने की बात कही।
सांसद की तीसरी और सबसे प्रमुख मांग इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की रही। हरसिमरत कौर का सीधा आरोप है कि बलात्कार और अपहरण जैसे अत्यंत गंभीर और संवेदनशील आपराधिक मामलों को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का सहारा लिया गया है। उन्होंने कहा कि चूंकि मामला सीधे तौर पर सत्ता के शीर्ष केंद्र से जुड़ा है, इसलिए पंजाब पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
‘पीड़ितों को न्याय दिलाना प्राथमिकता’
राष्ट्रीय महिला आयोग से मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए अकाली सांसद ने कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र जांच का आदेश दिया जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच से ही सच सामने आ पाएगा और पीड़ितों को न्याय मिल सकेगा।
गौरतलब है कि इस मामले के सामने आने के बाद से ही पंजाब में आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच तीखी बयानबाजी जारी है। हालांकि, कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर डॉ. गुरप्रीत मान के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों की किसी भी स्वतंत्र संस्था या एजेंसी द्वारा अब तक पुष्टि नहीं की गई है।

