Gen Z Benching Trend: आजकल की डिजिटल जनरेशन यानी जेन जी (Gen Z) की डेटिंग लाइफ अजीबोगरीब ट्रेंड्स से भरी पड़ी है, जहां रिश्ते बनने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। किसी को पसंद करना और उसे अपनी जिंदगी में जगह देना अब दो बिल्कुल अलग बातें बन चुकी हैं। कई बार कोई इंसान आपसे घंटों बातें करता है, सोशल मीडिया पर रील्स शेयर करता है और आपका हालचाल भी पूछता है, लेकिन जब रिश्ते को नाम देने की बारी आती है तो वह कन्नी काट लेता है। आपको यह भ्रम रहता है कि बात आगे बढ़ेगी, जबकि हकीकत में सामने वाला आपको न तो अपनाता है और न ही अपनी जिंदगी से दूर जाने देता है। डेटिंग की दुनिया में इसी मानसिक और भावनात्मक खेल को ‘बेंचिंग’ कहा जाता है।
क्या होती है बेंचिंग और कैसे चलता है यह खेल?
खेल के मैदान में खिलाड़ी जिस तरह बेंच पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करता है, कुछ वैसी ही स्थिति डेटिंग में ‘बेंचिंग’ के शिकार शख्स की होती है। इसमें सामने वाला इंसान आपके साथ एक सुरक्षित दूरी बनाकर खेलता है और बीच-बीच में अपनी मौजूदगी दर्ज कराता रहता है। वह आपकी हर सोशल मीडिया स्टोरी पर दिल वाले इमोजी भेजेगा या अचानक आधी रात को मैसेज करके पुरानी यादें ताज़ा करेगा। लेकिन जैसे ही आप उससे मिलने का प्लान बनाते हैं या रिश्ते को आगे ले जाने की बात करते हैं, वह किसी न किसी बहाने पीछे हट जाता है।
आप किसी के साथ हफ्तों से लगातार चैट कर रहे होते हैं और अचानक वो इंसान गायब हो जाता है। जब आप उससे तंग आकर दूरी बनाने लगते हैं, तो उसका एक मैसेज आता है, ‘अरे, आजकल बहुत व्यस्त था, कैसी हो?’ उनके इस एक छोटे से संदेश से आपको फिर से उम्मीद बंध जाती है कि शायद वह आपके लिए सीरियस हो रहा है। हालांकि, कुछ ही दिनों में वही पुराना रवैया और दूरी फिर से लौटने लगती है। मुमकिन है कि वो इंसान असल जिंदगी में किसी और को डेट कर रहा हो और आपको महज एक सुरक्षित बैकअप प्लान की तरह सहेज कर रख रहा हो।
लोग क्यों करते हैं ऐसा और इसके पीछे की मानसिकता क्या है?
इस तरह के व्यवहार के पीछे कई तरह की मनोवैज्ञानिक वजहें काम करती हैं। कुछ लोगों को अकेलेपन से इतना डर लगता है कि वे हमेशा किसी न किसी का साया अपने आसपास चाहते हैं। वहीं कुछ लोग अपने विकल्पों को हमेशा खुला रखना चाहते हैं ताकि जब तक कोई बेहतर विकल्प न मिल जाए, तब तक पुराना पत्ता हाथ से न निकले। आज के दौर में डेटिंग ऐप्स और सोशल मीडिया ने लोगों के पास् ऑप्शंस की भरमार कर दी है, जिसके चलते एक साथ कई लोगों से भावनात्मक रूप से खेलना आसान हो गया है। कई बार इंसान खुद भी इस बात को लेकर असमंजस में रहता है कि उसे असल में जिंदगी में चाहिए क्या, और इसी फेर में वो सामने वाले का वक्त बर्बाद करता रहता है।
कैसे पहचानें कि आप किसी के बैकअप ऑप्शन हैं?
अपने रिश्ते को लेकर साफ-सुथरा सोचना बेहद जरूरी है ताकि आपका भावनात्मक शोषण न हो सके। यदि कोई इंसान सिर्फ अपने खाली वक्त में या जब उसका मूड हो, तभी आपको याद करता है, तो समझ जाइए कि दाल में कुछ काला है। मिलने की योजनाएं बार-बार आखिरी वक्त पर रद्द होना या प्यार और कमिटमेंट के नाम पर हर बार विषय बदल देना बेंचिंग के सबसे बड़े लक्षण हैं। ऐसे वक्त में खुद को दुविधा में रखने से बेहतर है कि सीधे और दो टूक शब्दों में सामने वाले से उसकी स्थिति स्पष्ट कर ली जाए। किसी की जिंदगी में पहली पसंद बनने के लिए आपको अपनी तरफ से कोई गिमिक्स या लगातार पापड़ बेलने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

