Guru Ravidas Ji 650th Prakash Purab Faridkot : शिरोमणि संत श्री गुरु रविदास महाराज जी के 650वें प्रकाश पर्व को अलौकिक और यादगार तरीके से मनाने के लिए पंजाब सरकार द्वारा राज्यभर में विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला चलाई जा रही है। इसी कड़ी के तहत फरीदकोट जिले के ग्रामीण अंचलों में एक अनूठी और सार्थक पहल देखने को मिली। गुरु साहिब के पावन जीवन, उनके महान दर्शन और सामाजिक सुधारों पर आधारित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन जिले के विभिन्न गांवों में किया गया, जिसे स्थानीय संगत का व्यापक समर्थन और अपार स्नेह मिला।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सहयोग से आयोजित इस अभियान के दौरान फरीदकोट के गांव घुद्दू वाला, भाग सिंह वाला और किंगरा में बड़ी स्क्रीन लगाकर ग्रामीणों को यह डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। 30 मिनट की इस प्रेरक डॉक्यूमेंट्री में श्री गुरु रविदास जी के जीवन संघर्ष, उनके द्वारा दिखाए गए सत्य के मार्ग और तत्कालीन समाज में फैले भेदभाव को समाप्त करने के लिए किए गए प्रयासों को बेहद जीवंत तरीके से पेश किया गया है।
मानवता, सेवा और सामाजिक समानता का दिया गया संदेश
इस वृत्तचित्र के माध्यम से गुरु जी द्वारा रचित वाणी के मूल भाव—मानवीय मूल्यों की रक्षा, सामाजिक समानता, आपसी सौहार्द, निष्काम सेवा भावना और श्रम की प्रतिष्ठा (कीरत करो)—को बहुत ही सरल और प्रभावशाली ढंग से संगत के समक्ष रखा गया। फिल्म देखने पहुंचे बुजुर्गों, महिलाओं और विशेषकर युवाओं पर इन उपदेशों का गहरा प्रभाव देखने को मिला।
प्रसारण के दौरान पूरे माहौल में गुरु साहिब के प्रति अगाध श्रद्धा नजर आई और उपस्थित संगत ने हर दृश्य को बेहद ध्यानपूर्वक देखा।
‘नई पीढ़ी तक शिक्षाएं पहुंचाने के लिए ऐसे प्रयास जरूरी’—गांववासी
डॉक्यूमेंट्री देखने के बाद तीनों गांवों के निवासियों ने पंजाब सरकार की इस सांस्कृतिक और धार्मिक पहल की दिल खोलकर तारीफ की। ग्रामीणों का कहना था कि आज के आधुनिक दौर में, जब नई पीढ़ी अपनी जड़ों और महान धार्मिक विरासत से दूर हो रही है, तब ऐसी डॉक्यूमेंट्री फिल्में दिखाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
गांववालों ने कहा कि श्री गुरु रविदास महाराज जी की सार्वभौमिक शिक्षाएं केवल किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती हैं। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की कि इस तरह के ज्ञानवर्धक और चेतना फैलाने वाले कार्यक्रमों को भविष्य में भी लगातार आयोजित किया जाना चाहिए ताकि गुरु साहिब के ‘बेगमपुरा’ (ऐसा समाज जहां कोई दुखी या भयभीत न हो) के सपने को साकार किया जा सके।
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