August 10, 2026

Sohna Elevated Road: ‘950 करोड़ की सड़क, 3 महीने से मरम्मत और फिर धंस गई’: गुरुग्राम में सोहना एलिवेटेड रोड का बुरा हाल

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Sohna Elevated Road: '950 करोड़ की सड़क, 3 महीने से मरम्मत और फिर धंस गई': गुरुग्राम में सोहना एलिवेटेड रोड का बुरा हाल

'950 करोड़ की सड़क, 3 महीने से मरम्मत और फिर धंस गई': गुरुग्राम में सोहना एलिवेटेड रोड का बुरा हाल

Sohna Elevated Road: गुरुग्राम का हाई-प्रोफाइल सोहना एलिवेटेड रोड एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और घटिया निर्माण की जीती-जागती मिसाल बन गया है। जिस एलिवेटेड रोड की मरम्मत का काम पिछले करीब तीन महीनों से युद्धस्तर पर जारी था, वह सड़क बनने से ठीक पहले दोबारा धंस गई। सुभाष चौक के समीप हुए इस हादसे में सड़क निर्माण कार्य में लगा एक ट्रक अचानक धंसी जमीन के अंदर जा धंसा। सूचना मिलते ही गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की टीमों में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में काम रुकवाना पड़ा।

गुरुग्राम का हाई-प्रोफाइल सोहना एलिवेटेड रोड एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और घटिया निर्माण की जीती-जागती मिसाल बन गया है। जिस एलिवेटेड रोड की मरम्मत का काम पिछले करीब तीन महीनों से युद्धस्तर पर जारी था, वह सड़क बनने से ठीक पहले दोबारा धंस गई। सुभाष चौक के समीप हुए इस हादसे में सड़क निर्माण कार्य में लगा एक ट्रक अचानक धंसी जमीन के अंदर जा धंसा। सूचना मिलते ही गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की टीमों में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में काम रुकवाना पड़ा।

मास्टर सीवर लाइन का लीकेज बनी जी का जंजाल

लगभग 950 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किए गए इस सोहना एलिवेटेड रोड की बदहाली का यह कोई पहला मामला नहीं है। सुभाष चौक के पास सड़क के ठीक नीचे से जीएमडीए की मुख्य (मास्टर) सीवर लाइन गुजरती है। सीवर लाइन में लगातार हो रहे लीकेज के कारण यहां की मिट्टी खोखली हो रही है, जिससे सड़क बार-बार बैठ जाती है। महज छह महीने पहले ही यहां मरम्मत का काम कराया गया था, लेकिन पहली ही मानसूनी बारिश और सीवर के रिसाव ने निर्माण दावों की धज्जियां उड़ा दीं।

3 महीने से दो लेन बंद, रेंगने को मजबूर वाहन चालक

बार-बार सड़क धंसने के चलते पिछले तीन महीनों से इस फ्लाईओवर की तीन में से दो लेन को यातायात के लिए पूरी तरह बंद रखा गया था। इसके कारण सुभाष चौक अंडरपास और सोहना रोड पर रोजाना किलोमीटर लंबा जाम लग रहा है, जिससे हजारों वाहन चालकों को रोजाना फजीहत झेलनी पड़ रही है। राहगीरों को उम्मीद थी कि मरम्मत पूरी होने के बाद राहत मिलेगी, लेकिन ऐन वक्त पर हुए इस हादसे ने अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटिया निर्माण सामग्री का आरोप, स्थायी समाधान अब भी गायब

स्थानीय निवासियों और राहगीरों का सीधा आरोप है कि इस जगह पर सीवर लाइन का चैंबर बेहद घटिया गुणवत्ता की सामग्री से बनाया गया है। बारिश के पानी और सीवर लीकेज का असर सीधे सड़क के बेस पर पड़ रहा है। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने फिलहाल मरम्मत कार्य पर रोक लगा दी है और तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, देखना यह होगा कि करोड़ों रुपये के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को इंजीनियरिंग की इस नाकामी से कब तक निजात मिलती है और आम जनता को इस जाम से कब मुक्ति मिलती है।

लगभग 950 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किए गए इस सोहना एलिवेटेड रोड की बदहाली का यह कोई पहला मामला नहीं है। सुभाष चौक के पास सड़क के ठीक नीचे से जीएमडीए की मुख्य (मास्टर) सीवर लाइन गुजरती है। सीवर लाइन में लगातार हो रहे लीकेज के कारण यहां की मिट्टी खोखली हो रही है, जिससे सड़क बार-बार बैठ जाती है। महज छह महीने पहले ही यहां मरम्मत का काम कराया गया था, लेकिन पहली ही मानसूनी बारिश और सीवर के रिसाव ने निर्माण दावों की धज्जियां उड़ा दीं।

3 महीने से दो लेन बंद, रेंगने को मजबूर वाहन चालक

बार-बार सड़क धंसने के चलते पिछले तीन महीनों से इस फ्लाईओवर की तीन में से दो लेन को यातायात के लिए पूरी तरह बंद रखा गया था। इसके कारण सुभाष चौक अंडरपास और सोहना रोड पर रोजाना किलोमीटर लंबा जाम लग रहा है, जिससे हजारों वाहन चालकों को रोजाना फजीहत झेलनी पड़ रही है। राहगीरों को उम्मीद थी कि मरम्मत पूरी होने के बाद राहत मिलेगी, लेकिन ऐन वक्त पर हुए इस हादसे ने अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटिया निर्माण सामग्री का आरोप, स्थायी समाधान अब भी गायब

स्थानीय निवासियों और राहगीरों का सीधा आरोप है कि इस जगह पर सीवर लाइन का चैंबर बेहद घटिया गुणवत्ता की सामग्री से बनाया गया है। बारिश के पानी और सीवर लीकेज का असर सीधे सड़क के बेस पर पड़ रहा है।

मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने फिलहाल मरम्मत कार्य पर रोक लगा दी है और तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, देखना यह होगा कि करोड़ों रुपये के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को इंजीनियरिंग की इस नाकामी से कब तक निजात मिलती है और आम जनता को इस जाम से कब मुक्ति मिलती है।

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