Hansi Deepotsav: दीपावली का पर्व केवल रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन संस्कृति, संस्कारों और सामूहिक आत्मीयता को सहेजने का एक बड़ा माध्यम है। इस भावना को जीवंत करते हुए हरियाणा के हांसी स्थित यति नगर पार्क में एक ऐसा भव्य दीपोत्सव आयोजित किया गया, जिसने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
हांसी में पहली बार इतने बड़े स्तर पर 3100 मिट्टी के दीप जलाकर दीपावली मनाने की अनूठी पहल की गई। शाम ढलते ही जब हजारों दीपों की लौ एक साथ जली, तो पूरा पार्क अलौकिक रोशनी से नहा उठा और वहां मौजूद हर शख्स का मन श्रद्धा से भर गया।
दीपों के शृंगार से उभरी ‘जय श्रीराम’ की भव्य आकृति
इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत इसकी सजावट और उसकी दिव्यता रही। स्थानीय लोगों ने केवल यूं ही दीये नहीं जलाए, बल्कि उन्हें बेहद करीने से सजाकर भगवान की प्रतिमा और भव्य ‘जय श्रीराम’ की आकृति का रूप दिया। जैसे ही सभी 3100 दीप प्रज्वलित हुए, वह दृश्य इतना मनमोहक था कि बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी भाव-विभोर हो उठे।
हांसी के इस पार्क में आयोजित दीपोत्सव ने त्रेता युग की उस अयोध्या की याद दिला दी, जब भगवान राम के स्वागत में दीये जलाए गए थे। हर आयु वर्ग के लोगों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और सामूहिक रूप से दीपावली की खुशियां बांटीं।
चाइनीज लाइटों से दूरी, स्वदेशी और परंपरा पर जोर
आज के आधुनिक दौर में जहां लोग चमक-दमक के लिए चाइनीज लाइटों और एलईडी का इस्तेमाल करते हैं, वहीं हांसी के इस आयोजन ने एक मजबूत संदेश दिया। इस दीपोत्सव में आधुनिक साज-सजावट को दरकिनार कर पूरी तरह भारतीय परंपरा के प्रतीक मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता दी गई।
सभी 3100 दीपों में शुद्ध सरसों का तेल डाला गया और रुई की बत्तियों से उन्हें रोशन किया गया। समाजसेवी नरेश यादव ढाणा वाले ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सामूहिक रूप से ऐसे आयोजन समाज में आपसी भाईचारे, एकजुटता और धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं। पारंपरिक मिट्टी के दीये जलाना हमारी सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखने का सबसे बेहतरीन जरिया है, जो आधुनिकता के इस दौर में हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखता है।
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