Punjab Weather Monsoon Update : पंजाब-चंडीगढ़ में थमे बारिश के आसार, गर्मी बढ़ते ही पावर ग्रिड पर बढ़ा दबाव

पंजाब-चंडीगढ़ में थमे बारिश के आसार, गर्मी बढ़ते ही पावर ग्रिड पर बढ़ा दबाव
Punjab Weather Monsoon Update : पंजाब और राजधानी चंडीगढ़ में मानसून के तेवर अचानक नरम पड़ गए हैं। बादलों की बेरुखी के चलते पूरे इलाके में एक बार फिर चिपचिपी गर्मी और उमस का प्रकोप लौटने लगा है। मौसम विभाग की मानें तो अगले कुछ दिनों तक पठानकोट, रूपनगर और होशियारपुर को छोड़कर ज्यादातर जिलों में भारी बारिश की कोई उम्मीद नहीं है। जिन तीन जिलों में बादल बरसने के आसार जताए भी गए हैं, वहां भी केवल हल्की से मध्यम बौछारें ही पड़ सकती हैं।
मंगलवार को भी मौसम विज्ञान केंद्र ने बारिश का अनुमान जताया था, लेकिन आसमान दिनभर साफ ही रहा। इस समय बारिश कराने वाली मानसून ट्रफ पंजाब के फिरोजपुर से होकर जरूर गुजर रही है, जिससे हवा में नमी बनी हुई है। हालांकि, किसी मजबूत वेदर सिस्टम के सक्रिय न होने के कारण झमाझम बारिश की संभावना फिलहाल टल गई है।
तापमान चढ़ा, फरीदकोट रहा सबसे गर्म
बारिश रुकते ही पारे ने ऊपर चढ़ना शुरू कर दिया है। राज्य के औसतन अधिकतम तापमान में 0.3 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो अब सामान्य से करीब 1.6 डिग्री ज्यादा हो चुका है। मंगलवार को फरीदकोट राज्य का सबसे गर्म इलाका रहा, जहां पारा 36 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर हरियाणा के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण और उत्तर-पूर्व की तरफ बढ़ा पश्चिमी विक्षोभ स्थानीय स्तर पर थोड़े-बहुत बादल जरूर बना सकता है, लेकिन इसका कोई बड़ा असर देखने को नहीं मिलेगा।
मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के निदेशक सुरेंद्र पाल ने बताया कि 14 सितंबर तक राज्य में केवल चुनिंदा स्थानों पर ही गरज-चमक के साथ हल्की-फुल्की फुहारें पड़ सकती हैं। इस दौरान कुछ जगहों पर आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी भी दी गई है।
सुबह 6 बजे ही 13 हजार मेगावाट छूने लगी बिजली की मांग
मानसून की सुस्ती का सीधा असर पंजाब के पावर सप्लाई सिस्टम पर देखने को मिल रहा है। पसीने से तरबतर करने वाली उमस के कारण लोग एसी और कूलरों पर निर्भर हो गए हैं। आलम यह रहा कि बुधवार सुबह 6 बजे ही राज्य में बिजली की कुल मांग 12,969 मेगावाट के आंकड़े को पार कर गई।
इस भारी-भरकम मांग को पूरा करने के लिए पंजाब को बाहरी स्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है। राज्य में इस समय मात्र 4,576 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन हो रहा है, जबकि बाकी की 8,395 मेगावाट बिजली बाहर से खरीदी जा रही है। ग्रिड को संतुलित रखने के लिए तय सीमा से करीब 470 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खींचनी पड़ रही है।
भाखड़ा और पोंग बांध सुरक्षित स्थिति में
राहत की बात यह है कि पिछले दिनों हुई बारिश के बावजूद राज्य के प्रमुख बांधों का जलस्तर पूरी तरह नियंत्रण में है। भाखड़ा बांध में जलस्तर फिलहाल 1,643.36 फीट दर्ज किया गया है, जहां 27,440 क्यूसेक पानी की आवक के मुकाबले 25,300 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं, पोंग बांध में जलस्तर 1,372.5 फीट है, जिसमें 15,874 क्यूसेक आवक के सामने 12,315 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। दोनों ही जलाशयों में पानी का स्तर खतरे के निशान से सुरक्षित दूरी पर बना हुआ है।
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