Haryana Electricity Board: नीलोखेड़ी में बिजली कर्मचारियों का फूटा गुस्सा: एग्री डिस्कॉम के विरोध में निगदु सब डिवीजन पर हुई गेट मीटिंग
नीलोखेड़ी में बिजली कर्मचारियों का फूटा गुस्सा: एग्री डिस्कॉम के विरोध में निगदु सब डिवीजन पर हुई गेट मीटिंग
Haryana Electricity Board: बिजली विभाग के निजीकरण की आहट के खिलाफ कर्मचारियों का गुस्सा अब सड़कों और कार्यालयों तक पहुंचने लगा है। इसी कड़ी में संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर नीलोखेड़ी के निगदु स्थित सब डिवीजन कार्यालय में सब यूनिट स्तर पर एक अहम गेट मीटिंग का आयोजन किया गया।
इस विरोध प्रदर्शन की अध्यक्षता सब यूनिट प्रधान सतपाल ने की, जबकि मंच संचालन की जिम्मेदारी सब यूनिट सचिव विजय मिगलानी ने बखूबी संभाली। बैठक का मुख्य मकसद सरकार की उस योजना का विरोध करना था, जिसके तहत एग्री डिस्कॉम के नाम पर बिजली विभाग को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही कर्मचारियों की लंबे समय से लटकी पड़ी मांगों को भी पुरजोर तरीके से उठाया गया।
उपभोक्ता और कर्मचारी दोनों के हितों पर चोट
गेट मीटिंग के दौरान कर्मचारियों का आक्रोश साफ तौर पर देखा जा सकता था। यूनिट नंबर-1 के सचिव राजेश वर्मा ने इस दौरान सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विभाग की नीतियां न केवल कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं, बल्कि आम उपभोक्ताओं के हितों के भी पूरी तरह खिलाफ हैं।
उनका साफ कहना था कि यदि बिजली वितरण का जिम्मा निजी कंपनियों को सौंपा गया, तो इससे महंगाई का बोझ सीधे आम जनता की जेब पर पड़ेगा और कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी। वक्ताओं ने एक स्वर में मांग की कि एग्री डिस्कॉम की इस योजना को फौरन रद्द किया जाए और कर्मचारियों की पेंडिंग मांगों का समाधान निकाला जाए।
आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी
इस विरोध सभा में पवन कुमार (एसए), शेषनाथ यादव, कृष्ण लाल, दीपक नागपाल, सतबीर फोरमैन, पवन कुमार फोरमैन, राजेश कुमार फोरमैन, बालकिशन (सीए), विपिन, रवि, विजय शंकर, कुलदीप, मनजीत, अशोक, जसमेर, महेंद्र, संजीव, सोनू, रॉबिन, पवन कुमार (एसएसए) और सुनील समेत बड़ी संख्या में विभागीय कर्मचारी मौजूद रहे।
बैठक के आखिर में सभी कर्मचारियों ने एकजुट होकर हुंकार भरी और सरकार को दो टूक चेतावनी दी। कर्मचारियों ने साफ कर दिया कि यदि सरकार ने निजीकरण की अपनी जिद नहीं छोड़ी और समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो संयुक्त संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में इस आंदोलन को और भी ज्यादा आक्रामक रूप दिया जाएगा।
