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Haryana Family ID: छोटे किसानों को बड़ी राहत, 5 लाख से कम की फसल बिक्री अब फैमिली आईडी में नहीं जुड़ेगी

Haryana Family ID: छोटे किसानों को बड़ी राहत, 5 लाख से कम की फसल बिक्री अब फैमिली आईडी में नहीं जुड़ेगी

सीएम नायब सैनी का बड़ा फैसला: ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ का डेटा PPP से हटा, बटाईदारों की खुली लॉटरी

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AAmandeep Singh

Haryana Family ID: हरियाणा के छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) यानी फैमिली आईडी में आय के मूल्यांकन से जुड़े एक बेहद पेचीदा नियम को बदल दिया है।

नए आदेश के तहत, अब ई-खरीद पोर्टल के माध्यम से 5 लाख रुपये से कम की फसल बेचने वाले किसानों की इस कमाई को उनकी पारिवारिक आय में शामिल नहीं किया जाएगा। सरकार के इस कदम से उन लाखों ग्रामीण परिवारों को सीधा फायदा होगा, जो अब तक कागजी विसंगतियों के चलते सरकारी योजनाओं की पात्रता से बाहर हो जाते थे।

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‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ का डेटा अब नहीं बनेगा रोड़ा

हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण के राज्य समन्वयक डॉ. सतीश खोला ने इस महत्वपूर्ण फैसले की बारीकियां साझा की हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर यह सुधार लागू किया गया है। अब तक व्यवस्था यह थी कि ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर किसान जितनी रकम की फसल बेचता था, वह पूरी राशि उसके परिवार की शुद्ध आय मान ली जाती थी।

इस तकनीकी पेंच के कारण वास्तविकता से कहीं ज्यादा आय कागजों पर दिखने लगती थी और गरीब व जरूरतमंद किसान भी बीपीएल कार्ड, मुफ्त इलाज और अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से महरूम रह जाते थे।

बटाईदारों और 3 एकड़ तक के किसानों को सीधा फायदा

डॉ. सतीश खोला के मुताबिक, इस बदलाव का सबसे बड़ा और सीधा लाभ उन किसानों को मिलेगा जो दूसरों की जमीन पट्टे (बटाई) पर लेकर खेती करते हैं या जिनके पास 3 एकड़ तक की बेहद कम कृषि भूमि है।

अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल उन्हीं मामलों को आय निर्धारण के दायरे में लाया जाएगा, जहां ई-प्रोक्योरमेंट (ई-खरीद) का आंकड़ा सालाना 5 लाख रुपये की सीमा को पार करेगा। सरकार की मंशा साफ है कि महज तकनीकी त्रुटियों, डेटा की विसंगतियों या फसल की कुल बिक्री को असल मुनाफा मान लेने की गलती के कारण किसी भी असली हकदार का हक न मारा जाए।

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