September 11, 2026

Gaganjot Sandhu Suicide: पिहोवा के पूर्व मंत्री जसविंदर संधू के बेटे गगनजोत ने चंडीगढ़ में खुद को मारी गोली

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Gaganjot Sandhu Suicide: पिहोवा के पूर्व मंत्री जसविंदर संधू के बेटे गगनजोत ने चंडीगढ़ में खुद को मारी गोली

पिहोवा के पूर्व मंत्री जसविंदर संधू के बेटे गगनजोत ने चंडीगढ़ में खुद को मारी गोली

Gaganjot Sandhu Suicide: हरियाणा के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों से एक बेहद दुखद और स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है। कुरुक्षेत्र जिले के पिहोवा क्षेत्र से चार बार विधायक और पूर्व कृषि मंत्री रहे स्वर्गीय जसविंदर सिंह संधू के बेटे गगनजोत संधू ने शुक्रवार को संदिग्ध परिस्थितियों में जीवन लीला समाप्त कर ली।

गगनजोत ने चंडीगढ़ स्थित अपने फार्म हाउस में खुद को गोली मार ली। घटना की सूचना मिलते ही चंडीगढ़ पुलिस और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। हालांकि, मौके से कोई सुसाइड नोट मिला है या नहीं और गगनजोत ने यह खौफनाक कदम क्यों उठाया, इसके कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।

सुबह ही कुरुक्षेत्र से चंडीगढ़ गए थे गगनजोत

पारिवारिक सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गगनजोत संधू शुक्रवार सुबह ही अपने गृह जिले कुरुक्षेत्र से चंडीगढ़ के लिए रवाना हुए थे। चंडीगढ़ पहुंचकर वे अपने फार्म हाउस पर रुके हुए थे, जहां दोपहर के वक्त अचानक गोली चलने की आवाज से हड़कंप मच गया। आसपास मौजूद लोग जब तक मौके पर पहुंचे, तब तक गगनजोत खून से लथपथ पड़े थे।

आनन-फानन में पुलिस को सूचित किया गया, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। दो बार अपने पैतृक गांव गुमथला गढ़ू के सरपंच रह चुके गगनजोत की असामयिक मृत्यु की खबर जैसे ही पिहोवा और कुरुक्षेत्र क्षेत्र में फैली, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

सियासत विरासत में मिली: पिहोवा से 4 बार विधायक रहे थे पिता जसविंदर संधू

गगनजोत के पिता स्व. जसविंदर सिंह संधू हरियाणा की राजनीति का एक कद्दावर चेहरा थे। उनका राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से शुरू हुआ था। वर्ष 1987 में जननायक चौधरी देवीलाल के दौर में वे अपने गांव गुमथला गढ़ू के सरपंच चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा और वर्ष 1991 में लोकदल के सिंबल पर पिहोवा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 1996 में वे दोबारा लगातार पिहोवा से विधायक चुने गए।

जसविंदर सिंह संधू के राजनीतिक जीवन का स्वर्णिम दौर वर्ष 2000 में आया, जब वे तीसरी बार विधायक बने और तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला की सरकार में उन्हें कैबिनेट कृषि मंत्री का अहम प्रभार सौंपा गया। हालांकि, वर्ष 2005 के चुनाव में उन्हें कांग्रेस दिग्गज हरमोहिंदर सिंह चट्ठा से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में संधू ने पिहोवा सीट से दोबारा धमाकेदार वापसी की और चौथी बार विधायक बने। इसी कार्यकाल के दौरान वे गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए और लीवर कैंसर के कारण 19 जनवरी 2019 को उनका निधन हो गया था।

पिता के निधन के बाद गगनजोत संधू ही क्षेत्र में अपने परिवार की सामाजिक और राजनीतिक विरासत को संभाल रहे थे। उनके इस तरह अचानक दुनिया से चले जाने से समर्थक और परिजन गहरे सदमे में हैं। फिलहाल पुलिस मामले के हर पहलू की गहराई से तफ्तीश कर रही है।

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