Haryana Guest Teacher Protest: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब दो दशकों से सेवाएं दे रहे 10,757 गेस्ट टीचर्स ने नौकरी पक्की कराने के लिए सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। कुरुक्षेत्र के पिपली स्थित ताज पार्क से शुरू हुआ यह ‘न्याय मार्च’ चंडीगढ़ की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रविवार को गुस्साए शिक्षकों ने जीटी रोड पर पिपली मिनी जू के पास करीब 15 मिनट तक चक्का जाम रखा, जिससे हाईवे पर दोनों ओर वाहनों का लंबा जाम लग गया। प्रदर्शन के दौरान महिला अध्यापकों ने सड़क पर बैठकर सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ उग्र नारेबाजी की।
शाहबाद में पड़ाव, कार सेवा का लंगर और सुबह फिर चंडीगढ़ की राह
पिपली में जाम खुलवाने के बाद शिक्षकों का जत्था पैदल आगे बढ़ा और देर शाम कुरुक्षेत्र के शाहबाद पहुंचा। आंदोलनकारियों ने रात शहीद ऊधम सिंह स्मारक परिसर में बिताई। इस दौरान स्थानीय गुरुद्वारा मंजी साहिब (कार सेवा) की ओर से पैदल चल रहे अध्यापकों के लिए रात के लंगर की व्यवस्था की गई। शाहबाद में विश्राम के बाद सोमवार सुबह तड़के ही सभी गेस्ट टीचर्स फिर लामबंद हुए और चंडीगढ़ राजभवन घेराव के संकल्प के साथ पैदल प्रस्थान कर गए।
2014 की पॉलिसी लागू हो, 6 फीसदी ब्याज के साथ मिले सारा एरियर
गेस्ट टीचर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश यादव और प्रवक्ता डॉ. अजय लोहान ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2014 में बनी 3 साल की नियमितीकरण नीति को अविलंब लागू किया जाए। शिक्षकों का कहना है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसलों के तहत उन्हें 28 मई 2014 की तिथि से नियमित कर्मचारी माना जाए। साथ ही, उसी तारीख से बकाया एरियर पर 6 फीसदी ब्याज, ग्रेच्युटी, पेंशन और सर्विस नियमों के तहत अन्य तमाम भत्ते दिए जाएं। मोर्चा प्रतिनिधियों ने याद दिलाया कि अपनी इन्हीं जायज मांगों को लेकर 23 जून से लघु सचिवालय के बाहर भी अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है।
अदालत का कड़ा रुख: ’20 साल सेवा लेकर शिक्षकों को स्पेयर नहीं बता सकती सरकार’
इस पूरे विवाद का इतिहास वर्ष 2005-06 से जुड़ा है, जब खाली पदों पर पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए करीब 12,700 गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति की गई थी। हाईकोर्ट में जब सरकार ने तर्क दिया कि यह केवल एक ‘अस्थायी व्यवस्था’ थी, तो अदालत ने इसे खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी कि दो दशकों तक लगातार सेवाएं लेने के बाद राज्य सरकार यह नहीं कह सकती कि ये केवल अस्थायी कर्मचारी हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षक समाज के निर्माण की नींव होते हैं और उन्हें किसी ‘स्पेयर पार्ट’ की तरह इस्तेमाल करके छोड़ा नहीं जा सकता।
26 अक्टूबर को विधायकों का घेराव, 1 नवंबर को 6 जिलों में मेगा रैलियां
अपनी मांगों को मनवाने के लिए संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने आगे के आंदोलन का खाका भी तैयार कर लिया है। 26 अक्टूबर को प्रदेश भर में सभी मंत्रियों और विधायकों को ज्ञापन सौंपकर दबाव बनाया जाएगा। इसके बाद 1 नवंबर को हरियाणा दिवस के अवसर पर गुरुग्राम, कैथल, अंबाला, करनाल, हिसार और रोहतक में समानांतर रैलियां आयोजित कर आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
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