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Haryana New EV Policy: हरियाणा में EV खरीदारों की मौज, शोरूम पर तुरंत मिलेगी सब्सिडी, सरकारी दफ्तरों के चक्कर खत्म

Haryana New EV Policy: हरियाणा में EV खरीदारों की मौज, शोरूम पर तुरंत मिलेगी सब्सिडी, सरकारी दफ्तरों के चक्कर खत्म

दिल्ली मॉडल पर तैयार होगी हरियाणा की नई ईवी नीति, जानिए कैसे सस्ती होंगी इलेक्ट्रिक कारें

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AAmandeep Singh

Haryana New EV Policy: हरियाणा में इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने का मन बना रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। सूबे की सरकार अपनी मौजूदा ई-वाहन नीति में एक बड़ा और उपभोक्ता हितैषी फेरबदल करने की तैयारी में है।

अब तक इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने के बाद सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और सब्सिडी के लिए लंबा इंतजार करने का झंझट हमेशा के लिए खत्म होने जा रहा है। सरकार के नए प्रस्ताव के मुताबिक, जैसे ही कोई उपभोक्ता ईवी शोरूम पर गाड़ी खरीदेगा, पात्रता के हिसाब से उसकी सब्सिडी राशि गाड़ी की कुल कीमत में से मौके पर ही कम कर दी जाएगी।

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उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि मौजूदा नीतियों की जटिलताओं को खत्म कर इसे पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।

सरकार का मानना है कि यदि शुरुआत में ही गाड़ी की कीमत कम मिलेगी, तो लोग पेट्रोल-डीजल गाड़ियों को छोड़कर तेजी से इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और कारों की तरफ शिफ्ट होंगे। इससे न केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर को रफ्तार मिलेगी, बल्कि पर्यावरण को भी बड़ा फायदा होगा।

दिल्ली और केंद्र के मॉडल का अध्ययन, एनसीआर के चार जिलों पर विशेष फोकस

हरियाणा का एक बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में आता है, जहां सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण की समस्या विकराल रूप ले लेती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह ने अधिकारियों से कहा है कि वे दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार की वर्तमान इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों का विस्तृत और तुलनात्मक अध्ययन करें।

इन दोनों नीतियों की खूबियों को अपनाकर हरियाणा के भौगोलिक और औद्योगिक ढांचे के हिसाब से एक व्यावहारिक नीति तैयार की जाएगी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के तहत हरित परिवहन के विजन को पूरा कर सके।

इस पूरी मुहिम का सबसे बड़ा असर गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर जैसे औद्योगिक शहरों में देखने को मिलेगा। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि विश्व बैंक के वित्तीय सहयोग से एनसीआर के इन चारों प्रमुख जिलों में सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बदलने का खाका तैयार कर लिया गया है।

इसके तहत करीब 90 करोड़ रुपये के बजट से 500 नई इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतारी जाएंगी। इन बसों को निर्बाध रूप से चलाने के लिए 200 हाई-टेक चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित होंगे, जिनमें निजी कंपनियों को भी निवेश के लिए आकर्षित किया जाएगा।

सिर्फ गाड़ियां ही नहीं, प्रदूषण के खिलाफ चौतरफा चक्रव्यूह रचेगी सरकार

बैठक में यह भी साफ किया गया कि सरकार की यह रणनीति सिर्फ सड़कों पर ई-वाहन दौड़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हवा को शुद्ध करने का एक बहुआयामी अभियान है।

नए थ्री-व्हीलर खरीदने और पुराने, धुआं उगलने वाले खटारा वाहनों को कबाड़ (स्क्रैप) में बदलने के लिए विशेष वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके अलावा, औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने के लिए फैक्ट्रियों में स्वच्छ डीजी सेट और कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (CEMS) लगाने में सरकार आर्थिक मदद देगी।

इस महाअभियान के तहत शहरों में उड़ने वाली धूल पर काबू पाने, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को मजबूत करने, पराली प्रबंधन के लिए बायो-डीकंपोजर को बढ़ावा देने और एयर क्वालिटी टेस्टिंग लैब को अपग्रेड करने जैसे कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हालांकि राज्य की मौजूदा ईवी नीति साल 2027 तक के लिए लागू है, लेकिन तकनीक में आ रहे बदलावों और बाजार की मांग को देखते हुए समय से पहले ये संशोधन किए जा रहे हैं ताकि हरियाणा को देश का सबसे बेहतरीन ग्रीन ट्रांसपोर्ट मॉडल बनाया जा सके।

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