Haryana News: हरियाणा में कच्चे कर्मचारियों और सफाई कर्मियों की चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच प्रशासनिक महकमे से एक बड़ी और चौकाने वाली खबर सामने आई है। आंदोलनकारी सफाई कर्मचारियों के समर्थन में उतरकर सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखना सहकारिता विभाग के एक इंस्पेक्टर को बेहद महंगा पड़ गया। शासन ने कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन मानते हुए इंस्पेक्टर को तुरंत प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। इस संबंध में हरियाणा सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालय, पंचकूला की ओर से बाकायदा आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं।
निलंबित किए गए अधिकारी की पहचान अमित कुमार के रूप में हुई है, जो वर्तमान में सहकारिता विभाग में बतौर इंस्पेक्टर तैनात थे। आदेशों के मुताबिक, निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय नूंह से बदलकर जिला सिरसा निर्धारित किया गया है, जहां उन्हें नियमित रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
करनाल वाल्मीकि भवन के अध्यक्ष भी हैं अमित कुमार, सोशल मीडिया पर उठाई थी आवाज
बता दें कि अमित कुमार सरकारी सेवा में होने के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी काफी सक्रिय रहते हैं। वे करनाल स्थित वाल्मीकि भवन के अध्यक्ष भी हैं और अक्सर सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर वाल्मीकि समाज, सामाजिक समरसता और वाल्मीकि भवन से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं।
हाल ही में जब प्रदेश भर में सफाई कर्मचारियों का आंदोलन उग्र हुआ और कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोला, तो अमित कुमार ने भी सोशल मीडिया पर सफाई कर्मियों के पक्ष में अपनी बात रखी। हालांकि, एक सरकारी पद पर रहते हुए सरकार विरोधी माने जाने वाले आंदोलन के समर्थन में पोस्ट डालना प्रशासनिक अधिकारियों को रास नहीं आया और विभाग ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए कड़ी गाज गिरा दी।
महकमे में मचा हड़कंप, कर्मचारी संगठनों में रोष
सरकारी इंस्पेक्टर पर हुई इस त्वरित अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद सहकारिता विभाग समेत राज्य के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। वहीं दूसरी ओर, सफाई कर्मचारियों और विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार अब अपनी नाकामियों और वादों से मुकरने के खिलाफ उठने वाली हर लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का काम कर रही है। उनका आरोप है कि जायज मांगों का समर्थन करने पर अधिकारियों व कर्मचारियों को डराने की नीयत से सस्पेंड किया जा रहा है, लेकिन ऐसे फैसलों से आंदोलन कमजोर होने के बजाय और ज्यादा मजबूत होगा।
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