Karnal Anti Smog Gun: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सटे हरियाणा के करनाल शहर में इन दिनों हवा में घुलते प्रदूषण और उड़ती धूल से आमजन को राहत दिलाने के लिए नगर निगम ने कमर कस ली है। सड़कों पर वाहनों के गुजरने से उड़ने वाले धूल के गुबार और बिगड़ते एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) से निपटने के लिए निगम बेड़े में एक हाई-टेक मशीन शामिल की गई है।
करीब 56 लाख रुपये की लागत से तैयार यह ट्रक माउंटेड एंटी स्मॉग गन वाटर स्प्रिंकलर मशीन अब शहर की मुख्य सड़कों पर पानी का छिड़काव कर हवा को साफ सुथरा बनाने का काम करेगी। मंगलवार को महापौर रेणु बाला गुप्ता ने नगर निगम कार्यालय के प्रांगण से इस मशीन को विधिवत रूप से हरी झंडी दिखाकर मैदान में उतारा।
9000 लीटर पानी की क्षमता और पांच साल का मेंटेनेंस प्लान
नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, इस अत्याधुनिक मशीन की खरीद पर 45 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि अगले पांच वर्षों तक इसके सुचारू रखरखाव और ऑपरेशन के लिए 11 लाख रुपये का अलग से प्रावधान रखा गया है। इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत इसका बड़ा वाटर टैंक है, जिसमें एक बार में 9000 लीटर पानी स्टोर किया जा सकता है।
भारी-भरकम ट्रक पर माउंट होने के कारण इसे शहर के किसी भी कोने, निर्माण स्थलों या अधिक धूल उड़ने वाले इलाकों में तुरंत और आसानी से तैनात किया जा सकेगा, जिससे बार-बार पानी भरने के लिए दूर जाने की समस्या भी खत्म होगी।
बड़े शहरों की तर्ज पर करनाल में भी प्रदूषण के खिलाफ जंग
मशीन को रवाना करने के बाद महापौर रेणु बाला गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सर्दियों के सीजन से पहले और शहर में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों के बीच उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली और गुरुग्राम जैसे महानगरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए इस तरह की एंटी स्मॉग गनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है।
अब करनाल में भी इसी आधुनिक तकनीक के जरिए धूल प्रदूषण को प्रभावी ढंग से दबाने में मदद मिलेगी। नगर निगम ने शहर के उन तमाम इलाकों की सूची तैयार की है जहां ट्रैफिक और निर्माण कार्यों के चलते धूल का प्रकोप ज्यादा रहता है।
राहगीरों और दुकानदारों को मिलेगी बड़ी राहत
सड़क किनारे मकान बनाकर रहने वाले लोगों, छोटे दुकानदारों और रोजमर्रा आवाजाही करने वाले दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मशीन एक बड़ी सौगात साबित होगी। तेज हवाओं या भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कों पर जो बारीक धूल उड़ती है, वह सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचकर गंभीर बीमारियां पैदा करती है।
यह मशीन पानी की बेहद महीन फुहारें (माइक्रोन ड्रॉपलेट्स) हवा में छोड़ेगी, जिससे हवा में तैरते धूल के कण भारी होकर नीचे बैठ जाएंगे। नगर निगम के इस कदम से न सिर्फ शहर की आबोहवा सुधरेगी बल्कि नागरिकों को साफ-सुथरा और स्वस्थ परिवेश मिलने की उम्मीद भी बंधेगी।
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