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Income Tax Discard Return: ITR दाखिल करने में हो गई है बड़ी गलती? चिंता छोड़ें और ऐसे इस्तेमाल करें ‘डिस्कार्ड रिटर्न’ का विकल्प

Income Tax Discard Return: ITR दाखिल करने में हो गई है बड़ी गलती? चिंता छोड़ें और ऐसे इस्तेमाल करें 'डिस्कार्ड रिटर्न' का विकल्प

गलत भरा ITR तो ऐसे करें ठीक, नहीं अटकेगा रिफंड

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GGaganpreet Kaur

Income Tax Discard Return: आयकर रिटर्न दाखिल करना हर नौकरीपेशा और कारोबारी के लिए एक बेहद गंभीर सालाना जिम्मेदारी है। इस प्रक्रिया में आंकड़ों की बाजीगरी ऐसी होती है कि छोटी सी लापरवाही या जल्दबाजी भी भारी पड़ सकती है। अक्सर लोग जानकारी के अभाव में कमाई के आंकड़े, सेविंग्स अकाउंट के ब्याज, बैंक डिटेल्स या डिडक्शन (टैक्स छूट) के दावों में गलतियां कर बैठते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा डर स्क्रूटनी का नोटिस आने या फिर रिफंड के अधर में लटक जाने का होता है। लेकिन आधुनिक होते टैक्स सिस्टम ने अब इस चिंता का एक स्मार्ट समाधान ढूंढ निकाला है। आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर मौजूद ‘डिस्कार्ड रिटर्न’ का विकल्प टैक्सपेयर्स के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है, जिसकी मदद से आप अपनी पुरानी गलती को सिस्टम से पूरी तरह मिटाकर नए सिरे से शुरुआत कर सकते हैं।

कैसे काम करता है यह नियम और क्या हैं शर्तें?

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यह सुविधा उन करदाताओं के लिए एक बेहतरीन ‘लाइफसेवर’ है, जिन्हें फॉर्म सबमिट करने या ई-वेरीफाई करने के ठीक बाद अपनी भूल का अहसास होता है। हालांकि, इस डिजिटल रबर का इस्तेमाल करने के लिए कुछ कड़े नियम और शर्तें तय की गई हैं। सबसे बुनियादी शर्त यह है कि आपका दाखिल किया गया मूल (ओरिजनल) रिटर्न केंद्रीय प्रसंस्करण केंद्र (CPC) द्वारा प्रोसेस नहीं किया गया होना चाहिए।

राहत की बात यह है कि आपने अपने आईटीआर का ई-वेरिफिकेशन (e-Verify) किया हो या न किया हो, जब तक वह ‘अंडर प्रोसेसिंग’ की स्थिति में है, आप पोर्टल पर जाकर ‘डिस्कार्ड’ बटन पर क्लिक कर सकते हैं। ऐसा करते ही पुराना रिटर्न केंद्रीय सर्वर से हमेशा के लिए डिलीट हो जाता है, मानो वह कभी दाखिल ही नहीं किया गया था। इसके तुरंत बाद पोर्टल आपको एक नया और त्रुटिहीन ओरिजिनल रिटर्न भरने की अनुमति दे देता है।

31 दिसंबर 2026 तक का है वक्त, पर ड्यू डेट का रखें ध्यान

इस नई व्यवस्था का लाभ उठाने के लिए कैलेंडर की तारीखों पर नजर रखना बेहद जरूरी है। असेसमेंट ईयर 2026-27 (फाइनेंशियल ईयर 2025-26) के लिए टैक्सपेयर्स इस डिस्कार्ड विकल्प का इस्तेमाल 31 दिसंबर 2026 तक ही कर सकेंगे। लेकिन यहां एक तकनीकी पेच है जिसे समझना आवश्यक है। यदि आप अपनी सामान्य अंतिम तिथि (जो आमतौर पर 31 जुलाई होती है) के भीतर रिटर्न डिस्कार्ड करके नया फॉर्म भरते हैं, तब तो कोई अतिरिक्त देनदारी नहीं बनती।

मगर, यदि आप 31 जुलाई की समय सीमा बीत जाने के बाद पुराना रिटर्न डिस्कार्ड करते हैं और फिर नया फॉर्म अपलोड करते हैं, तो विभाग उसे ‘बिलेटेड रिटर्न’ (देरी से भरा गया रिटर्न) की श्रेणी में रखेगा। ऐसी स्थिति में आपको अनजाने में हुई गलती के लिए नियमानुसार लेट फीस या जुर्माना भी भुगतना पड़ सकता है। इसलिए, समझदारी इसी में है कि विसंगति का पता चलते ही बिना वक्त गंवाए इस विकल्प को चुन लिया जाए।

“डिजिटल दौर में टैक्स फाइलिंग को आसान बनाना विभाग की प्राथमिकता है। ‘डिस्कार्ड रिटर्न’ का विकल्प टैक्सपेयर्स को बिना किसी दंडात्मक कार्रवाई के अपनी गलती सुधारने का एक ईमानदार मौका देता है।”

समय सीमा चूकने पर ‘रिवाइज्ड रिटर्न’ का है पारंपरिक सहारा

यदि किसी कारणवश आपका आईटीआर विभाग द्वारा प्रोसेस किया जा चुका है या आप दिसंबर की अंतिम समय सीमा को पार कर चुके हैं, तो आपके पास दूसरा रास्ता ‘रिवाइज्ड रिटर्न’ यानी संशोधित रिटर्न का बचता है। आयकर अधिनियम की धारा 139(5) के तहत आने वाले इस विकल्प में पुराना डेटा डिलीट नहीं होता, बल्कि उसी फाइल में सुधार करके एक नई संशोधित कॉपी सबमिट की जाती है।

बहरहाल, टैक्स एक्सपर्ट्स की राय हमेशा यही रहती है कि किसी भी अप्रिय स्थिति या कानूनी नोटिस से बचने के लिए फाइनल सबमिशन से पहले अपने फॉर्म 26AS, टीआईएस (TIS) और एआईएस (AIS) के आंकड़ों का मिलान खुद ही कर लें। अगर फिर भी कोई मानवीय चूक रह जाती है, तो डिस्कार्ड रिटर्न का यह ऑनलाइन फीचर आपके वित्तीय रिकॉर्ड को बिल्कुल बेदाग रखने का सबसे सुलभ और आधुनिक जरिया है।

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