Kurukshetra electricity strike: (पवन शर्मा) हरियाणाभर में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की चल रही तीन दिवसीय हड़ताल का दायरा अब गांवों तक फैल गया है। कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक और ग्रामीण क्षेत्र ज्योतिसर में (jyotisar 33kv substation news) स्थित 33 केवी सबस्टेशन पर इस विरोध-प्रदर्शन का सीधा असर देखने को मिल रहा है। बारना, बारवा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बिजली गुल रहने से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
तकनीकी अमले के हड़ताल पर चले जाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में यदि कोई फॉल्ट आ जाए, तो उसे दुरुस्त करने वाला कोई तकनीकी कर्मचारी मौके पर मौजूद नहीं है, जिससे लोगों और प्रशासन दोनों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
रात से बत्ती गुल, पानी के लिए जूझ रहे ग्रामीण
ज्योतिसर के सबस्टेशन पर तैनात एएलएम संदीप ने बताया कि वे ड्यूटी पर मौजूद हैं, लेकिन मैदानी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए पटवारी सलिंदर और उनके सहयोगियों को सबस्टेशन पर तैनात किया गया है, (haryana electricity employees strike) जबकि सुरक्षा की कमान एएसआई बलविंदर सिंह के नेतृत्व वाली पुलिस टीम के हाथों में है।
पटवारी सलिंदर के अनुसार, इस सबस्टेशन से कुल 14 फीडर संचालित होते हैं, जिनमें से कृषि क्षेत्र को बिजली देने वाले 5 फीडर पूरी तरह बंद पड़े हैं। बारवा गांव के निवासी प्रवीण शर्मा ने बताया कि उनके यहां बीती रात करीब 10 बजे से बिजली गायब है। बिजली न होने के चलते न सिर्फ घरेलू कामकाज थम गए हैं, बल्कि पीने के पानी का संकट भी सिर उठाने लगा है।
निजीकरण के विरोध में उतरा कर्मचारी वर्ग
राज्यभर के बिजली कर्मी 22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल पर हैं। इस आक्रोश की मुख्य वजह हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) द्वारा गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को 25 साल के लिए बिजली वितरण का लाइसेंस दिया जाना है। (kurukshetra rural power cut) कर्मचारियों का मानना है कि इससे बिजली क्षेत्र के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा, जो उपभोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों के हितों पर कुठाराघात है।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस फैसले के खिलाफ विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में अपील कर रही है और सीएम नायब सिंह सैनी ने भी हड़ताल वापस लेने की अपील की है। (haryana power corporation strike) इसके बावजूद कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। ज्योतिसर में तकनीकी स्टाफ की गैरमौजूदगी में बिजली व्यवस्था को संभालना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

