Kaithal Stubble Burning Cases: हरियाणा में पराली प्रबंधन को लेकर प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। कैथल जिले में नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में खेतों में फसल अवशेष जलाने का मामला सामने आया है। कृषि विभाग के अधिकारियों की पैनी नजर और मुस्तैदी के चलते एक ही रात में ऐसे चार मामलों का खुलासा हुआ है। पुलिस ने विभाग की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करते हुए विभिन्न थानों में आरोपी किसानों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर लिए हैं।
प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से जिले के उन किसानों में हड़कंप मच गया है जो प्रशासनिक पाबंदियों के बावजूद खेतों में आग लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट और सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं, जिनका उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
इन चार मामलों में दर्ज हुई एफआईआर
1. कुतबपुर गांव (सदर थाना): पहले मामले में सदर थाना क्षेत्र के अधीन आने वाले कुतबपुर गांव के किसान सताल के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। कृषि विभाग की सुपरवाइजर रविता ने शिकायत दी थी कि आरोपी किसान ने रात के समय खेत में पराली जलाई, जिससे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 का उल्लंघन हुआ है।
2. बड़सीकरी गांव (कलायत थाना): दूसरे मामले में कलायत थाना क्षेत्र के गांव बड़सीकरी के रहने वाले कपिंद्र को आरोपी बनाया गया है। कलायत कृषि विभाग के सुपरवाइजर अजय कुमार की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत प्रभाव से मामला दर्ज कर आगामी कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
3. देवबन गांव: तीसरे मामले में देवबन गांव निवासी कुलदीप के खिलाफ कार्रवाई की गई है। आरोपी पर आरोप है कि उसने खेतों में नियमों को ताक पर रखकर फसल अवशेषों में आग लगाई, जिससे न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा बल्कि सरकारी आदेशों की भी अवहेलना हुई।
4. जाखौली गांव (तितरम थाना): चौथे मामले में तितरम थाना पुलिस ने गांव जाखौली निवासी इलु राम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। कृषि विभाग के अधिकारी सुनील कुमार की ओर से दी गई लिखित शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
पुलिस जांच जारी, प्रशासन की दो टूक चेतावनी
मामले की पुष्टि करते हुए पुलिस प्रवक्ता प्रवीन श्योकंद ने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर सभी चार मामलों में संबंधित थानों में केस दर्ज कर लिए गए हैं। पुलिस अब अपने स्तर पर यह भी देख रही है कि इन घटनाओं में किन-किन अन्य लोगों की संलिप्तता रही है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई भी किसान नियमों की अनदेखी कर पर्यावरण को प्रदूषित करता पाया गया, तो उसके खिलाफ इसी तरह की कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।


