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Karnal News: अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते पर भड़की भाकियू, सरकार को दी बड़ी चेतावनी

Karnal News: अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते पर भड़की भाकियू, सरकार को दी बड़ी चेतावनी

डीएपी की किल्लत दूर करे सरकार; नीलोखेड़ी में किसानों की हुंकार

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GGaganpreet Kaur

Karnal News नीलोखेड़ी (महाबीर मैहला) हरियाणा के नीलोखेड़ी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव जांबा स्थित किसान भवन में भारतीय किसान यूनियन की एक अहम आपात बैठक बुलाई गई। इस बैठक में न केवल क्षेत्र के किसानों का दर्द छलका, बल्कि सरकार की मौजूदा कृषि नीतियों के खिलाफ भी तीखे तेवर देखने को मिले। बैठक में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सेवा सिंह आर्य ने सीधे तौर पर व्यवस्था पर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज का किसान कहने को तो देश का पेट भर रहा है, लेकिन खुद उसकी जेब खाली है। फसलों की बढ़ती लागत और उसके मुकाबले बेहद कम या नाममात्र का दाम मिलने के कारण ग्रामीण इलाकों में आर्थिक तंगी का संकट गहराता जा रहा है।

अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर फूंक-फूंककर कदम रखने की चेतावनी

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“हवा में तैर रही खबरों के मुताबिक सरकार अमेरिका के साथ कोई बड़ा व्यापारिक समझौता करने जा रही है। हमारी मांग है कि इस समझौते के दस्तावेज और शर्तें देश के किसान संगठनों के सामने रखी जाएं। अगर यह सौदा खेती-किसानी को फलने-फूलने में मदद करेगा तो हम इसका स्वागत करेंगे, लेकिन अगर इसके पीछे बहुराष्ट्रीय कंपनियों को फायदा पहुंचाने और हमारे किसानों को नुकसान देने की साजिश हुई, तो देश का किसान चुप नहीं बैठेगा और लोकतांत्रिक तरीके से सड़क पर उतरेगा।” – सेवा सिंह आर्य, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भाकियू

बैठक की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ किसान नेता धर्म सिंह मैहला ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि जिस देश की रीढ़ ही खेती हो, वहां के हुक्मरानों का किसान विरोधी रवैया बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि खाद, बीज, बिजली और डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है।

पाताल जाते पानी और घटिया इंफ्रास्ट्रक्चर पर तीखे सवाल

इस आपात बैठक में केवल फसलों के दामों की ही बात नहीं हुई, बल्कि हरियाणा के किसानों के सामने खड़े सबसे बड़े संकट ‘डार्क जोन’ यानी लगातार गिरते भू-जल स्तर पर भी गहरा मंथन हुआ। किसानों ने एक सुर में कहा कि अगर समय रहते बरसाती पानी को सहेजने के लिए बड़े बांध या चेकडैम नहीं बनाए गए, तो आने वाले सालों में पंजाब और हरियाणा की उपजाऊ जमीनें रेगिस्तान में तब्दील हो जाएंगी।

इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर चल रहे भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर भी किसानों का गुस्सा फूटा। बैठक में प्रस्ताव पास कर मांग की गई कि ड्रेनों (नहरों के सहायक नालों) की सफाई के नाम पर निकाली जा रही कीमती मिट्टी को अवैध रूप से बेचने के खेल की उच्च स्तरीय जांच हो। इसके अलावा, बिजली विभाग के ठेकेदारों द्वारा गांवों में लगाए जा रहे घटिया दर्जे के खंभों, ट्रांसफार्मरों और तारों के खिलाफ भी तुरंत कार्रवाई की जाए, क्योंकि इनसे आए दिन बड़े हादसे होने का डर बना रहता है।

भाकियू की सरकार के सामने रखी गई प्रमुख मांगें

बैठक के समापन पर भीम सिंह, नेकीराम, राजेंद्र सिंह, रामधारी, ईश्वर चंद और महेंद्र सिंह सहित दर्जनों मौजूद किसानों ने हाथ उठाकर यह संकल्प लिया कि जब तक सरकार उनकी इन जायज मांगों पर गौर नहीं करती, तब तक संगठन स्तर पर उनका यह लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।

यह भी पढ़ें–नीलोखेड़ी में घाट निर्माण और सौंदर्यीकरण के लिए बोर्ड को भेजा प्रस्ताव

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