Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र में हड़ताल खत्म होने पर भी काम से रोके गए सफाई कर्मचारी, DMC दफ्तर पर धरना

कुरुक्षेत्र में हड़ताल खत्म होने पर भी काम से रोके गए सफाई कर्मचारी, DMC दफ्तर पर धरना
Kurukshetra News: पूरे हरियाणा में निकाय सफाई कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त होने के बाद जहां राहत की उम्मीद जताई जा रही थी, वहीं धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में मामला सुलझने के बजाय और उलझ गया है। शनिवार सुबह 6 बजे जैसे ही नगर परिषद के पुराने सफाई कर्मचारी और टिप्पर चालक-सहायक अपनी ड्यूटी पर पहुंचे, तो संबंधित ठेकेदारों ने उन्हें काम पर लेने से साफ मना कर दिया। चालकों को गाड़ियों की चाबियां तक नहीं दी गईं, जिसके बाद कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने मोर्च खोल दिया।
हड़ताल के दौरान रखे गए थे नए कर्मी, अब पुरानी लेबर को लिया निशाने पर
दरअस्ल, बीते दिनों जब सफाई कर्मचारी हड़ताल पर थे, तब शहर में कचरे के अंबार से निपटने के लिए प्रशासन के दबाव में ठेकेदारों ने नए वैकल्पिक कर्मियों को टिप्परों के संचालन और सफाई व्यवस्था में तैनात कर दिया था। अब हड़ताल वापस होने के बाद ठेकेदार इन नए कर्मचारियों को हटाने को तैयार नहीं हैं और पुराने कर्मचारियों की अनदेखी की जा रही है। इसी के विरोध में सैकड़ों की संख्या में जमा हुए कर्मचारियों ने थानेसर स्थित DMC (जिला नगर आयुक्त) कार्यालय के मुख्य द्वार पर ही अपना डेरा जमा लिया।
शहर में फिर ठप हुआ कचरा उठान, DMC दफ्तर के बाहर जोरदार नारेबाजी
काम से रोके जाने के बाद कर्मचारियों का रोष चरम पर पहुंच गया। शनिवार सुबह से ही न तो शहर की सड़कों पर झाड़ू लग पाई है और न ही डोर-टू-डोर कचरा उठाने वाले टिप्पर सड़कों पर निकले हैं। DMC दफ्तर के बाहर बैठे कर्मचारियों ने प्रशासन और ठेकेदारों की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। कचरा प्रबंधन ठप होने से एक बार फिर कुरुक्षेत्र की सड़कों और मुख्य बाजारों में गंदगी का संकट मंडराने लगा है।
सर्वकर्मचारी संघ की चेतावनी: हक नहीं मिला तो पूरे प्रदेश में करेंगे बड़ा आंदोलन
धरने की अगुवाई कर रहे थानेसर इकाई के प्रधान सुनील लोहाट और सर्वकर्मचारी संघ के वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश ने कड़ा रुख अपनाया है। कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन कर्मचारियों ने सालों से अपनी सेवाएं दी हैं, उन्हें हड़ताल की आड़ में बाहर निकालना सरासर अन्याय है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप कर सभी पुराने कर्मचारियों को सम्मानजनक तरीके से वापस काम पर नहीं लिया, तो इस क्षेत्रीय विवाद को पूरे प्रदेश स्तर पर बड़े आंदोलन में तब्दील कर दिया जाएगा।
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