Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र में राजनीति की भेंट चढ़ा दशहरा, 26 साल बाद फिर दो जगहों पर होगा रावण दहन

कुरुक्षेत्र में राजनीति की भेंट चढ़ा दशहरा: 26 साल बाद फिर दो जगहों पर होगा रावण दहन
Kurukshetra News: धर्मनगरी कुरुक्षेत्र की सियासत का असर अब धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों पर भी साफ दिखने लगा है। कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा और भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री सुभाष सुधा के बीच जारी सियासी खींचतान के कारण इस बार कुरुक्षेत्र में दो दशहरा मेले लगाने की तैयारी है। शुक्रवार को पंजाबी धर्मशाला में विधायक अशोक अरोड़ा की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्वसम्मति से ‘सर्वजातीय दशहरा कमेटी’ का गठन कर अलग उत्सव मनाने पर मुहर लगा दी गई।
दो मंच और अलग बैठने का ऑफर खारिज, 4 दिन की मान-मनौव्वल नाकाम
विवाद की मुख्य वजह कुरुक्षेत्र दशहरा कमेटी के मंच पर मुख्य अतिथि की परंपरा को लेकर शुरू हुई थी। विधायक अशोक अरोड़ा का आरोप है कि पिछले दो सालों से स्थानीय विधायक को मुख्य अतिथि बनाने की पुरानी परिपाटी को बदलने की कोशिश की जा रही थी।
विवाद सुलझाने के लिए दशहरा कमेटी ने चार दिनों तक मैराथन बैठकें कीं। पूर्व मंत्री सुभाष सुधा ने भी सुझाव दिया कि विवाद से बचने के लिए एक ही मैदान में दो अलग-अलग मंच बनाए जा सकते हैं और समर्थकों के बैठने की व्यवस्था पृथक की जा सकती है। हालांकि, मान-सम्मान और व्यवस्था को लेकर दोनों पक्षों में बात नहीं बन सकी।
ब्रह्मसरोवर बनाम थीम पार्क: दो मैदानों में दिखेगी दशहरे की रंगत
अब तय हुआ है कि पुरानी कुरुक्षेत्र दशहरा कमेटी अपना traditional आयोजन शहर के थीम पार्क में ही करेगी, जबकि विधायक अशोक अरोड़ा के संरक्षण में बनी नई ‘सर्वजातीय दशहरा कमेटी’ ब्रह्मसरोवर के पास स्थित मेला ग्राउंड में मेले का आयोजन करेगी। अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि नया आयोजन किसी एक वर्ग का न होकर पूरे समाज का होगा, जिसमें भगवान श्रीराम की भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाएगी। सोमवार को नई कमेटी का प्रतिनिधिमंडल प्रशासनिक अनुमति के लिए कुरुक्षेत्र उपायुक्त (DC) से मुलाकात करेगा।
50 के दशक से जुड़ा है इतिहास, प्रशासन के सामने सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन की चुनौती
कुरुक्षेत्र में रावण दहन का इतिहास देश के विभाजन से जुड़ा है, जब पाकिस्तान से आए शरणार्थियों ने इस परंपरा को यहां दोबारा शुरू किया था। शुरुआत में शहर में दो जगह मेले लगते थे, लेकिन साल 2000 में अशोक अरोड़ा की कोशिशों से दोनों पक्ष एक मंच पर आए।
हालांकि, 2005 में पूर्व विधायक रमेश गुप्ता के समय एक साल के लिए फिर अलग आयोजन हुआ था, जिसके बाद से लगातार थीम पार्क में ही भव्य मेला लगता आ रहा था। अब 26 साल बाद दोबारा दो मेले लगने से जिला प्रशासन के सामने सुरक्षा, ट्रैफिक डायवर्जन और भीड़ को नियंत्रित करने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।\
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