Kurukshetra Underground Structure: कुरुक्षेत्र के नलवी गांव में 12 फीट नीचे निकला रहस्यमयी प्राचीन ढांचा
कुरुक्षेत्र के नलवी गांव में 12 फीट नीचे निकला रहस्यमयी प्राचीन ढांचा
Kurukshetra Underground Structure: धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के शाहाबाद उपमंडल के तहत आने वाले गांव नलवी में उस वक्त कौतूहल का माहौल बन गया, जब एक खेत की 12 फीट खुदाई के दौरान बेहद पुरानी चिनाई से बना एक ढांचा जमीन से बाहर निकल आया। छोटी ईंटों (लाखोरी/लकौरी ईंटों) और पारंपरिक चूने के गारे से बने इस ढांचे को देखकर ग्रामीण इसे करीब 150 से 200 साल पुराना बता रहे हैं।
ढांचा सामने आते ही गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया और देखते ही देखते स्थानीय लोग इसे आस्था से जोड़कर देखने लगे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यह सालों से जमीन में दबी ऐतिहासिक गोगामेड़ी या दरगाह का हिस्सा है, जिसके बाद वहां निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया है।
बुजुर्गों के दावों और मन्नतों के बीच शुरू हुई खुदाई
गांव के निवासी मनजीत ने बताया कि वे अपने बुजुर्गों और पूर्वजों से सालों से सुनते आ रहे थे कि पुल के पास स्थित किसी खेत में काफी पुरानी गोगामेड़ी दबी हुई है। हालांकि, यह मेड़ी किस विशेष खसरे या खेत में स्थित थी, इसकी सटीक जानकारी किसी के पास नहीं थी। क्योंकि यह इलाका बाढ़ प्रभावित रहा है, इसलिए पहले कभी किसी ने इतनी गहरी खुदाई करने का जोखिम नहीं उठाया था।
खेत मालिक तारा सिंह ने बताया कि पिछले करीब दो साल से उनका परिवार लगातार स्वास्थ्य समस्याओं और अन्य पारिवारिक परेशानियों से जूझ रहा था। इस दौरान गांव के बुजुर्गों ने उन्हें याद दिलाया कि उनके खेत के पास गोगामेड़ी का स्थान हो सकता है और वहां रास्ता छोड़कर जगह साफ करनी चाहिए। इसके बाद जब जेसीबी से 12 फीट तक खुदाई करवाई गई, तो चूने और ईंटों का यह प्राचीन ढांचा बाहर निकल आया।
वैज्ञानिक जांच से ही सामने आएगा असली कालखंड
भले ही ग्रामीणों ने आस्था के तहत जगह को सहेजना और निर्माण कार्य शुरू कर दिया हो, लेकिन इस तरह के पुरातात्विक अवशेषों का सही आकलन विशेषज्ञ जांच के बिना अधूरा है। यद्यपि ग्रामीणों की ओर से अभी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को औपचारिक आवेदन नहीं भेजा गया है, फिर भी एएसआई की वैज्ञानिक जांच इस स्थान के ऐतिहासिक सच को सामने लाने में निर्णायक हो सकती है।
पुरातत्वविदों के अनुसार, ईंटों का आकार, चूने-गारे की बनावट, निर्माण शैली, आसपास की मिट्टी की परतों (Stratigraphy) और मिलने वाले अन्य अवशेषों के कार्बन डेटिंग व सूक्ष्म अध्ययन से ही यह साबित हो पाएगा कि यह ढांचा असल में किस कालखंड का है और इसका मूल उपयोग क्या रहा होगा।
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