September 4, 2026

Ludhiana Bicycle : कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से 150 रुपए बढ़ सकते है साइकिल के दाम

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Ludhiana Bicycle : कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से 150 रुपए बढ़ सकते है साइकिल के दाम

कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से 150 रुपए बढ़ सकते है साइकिल के दाम

Ludhiana Bicycle : कच्चे माल की अनियंत्रित होती कीमतों और निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सामानों की बढ़ती लागत ने देश के सबसे बड़े साइकिल निर्माण केंद्र लुधियाना की टेंशन बढ़ा दी है। बीते महज एक महीने के भीतर इस्पात (स्टील) के दामों में लगभग 5,000 रुपये प्रति टन का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही टायर, ट्यूब, पेंट, केमिकल और अन्य कल-पुर्जों के रेट भी चढ़ गए हैं। लगातार घटते प्रॉफिट मार्जिन और गहराते संकट के बीच अब निर्माताओं ने साइकिलों के दाम बढ़ाने के संकेत दे दिए हैं।

सतलुज क्लब में जुटे प्रमुख निर्माता

उद्योग के सामने खड़ी इस नई चुनौती और इनपुट कॉस्ट के आकलन को लेकर शुक्रवार को लुधियाना के सतलुज क्लब में ‘जी-13 बाईसाइकिल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन’ के बैनर तले एक आपात बैठक बुलाई गई।

बैठक में प्रमुख निर्माताओं ने एक सुर में स्वीकार किया कि कच्चे माल की बेतहाशा बढ़ोतरी से मैन्युफैक्चरिंग का पूरा गणित गड़बड़ा गया है। अगर यही स्थिति बनी रही तो मजबूरी में निर्माताओं को अपनी लागत संरचना के हिसाब से प्रति साइकिल करीब 150 रुपये तक की बढ़ोतरी का कदम उठाना पड़ सकता है।

सामूहिक नहीं, व्यक्तिगत स्तर पर होगा रेट का फैसला

हालांकि, एसोसिएशन ने साफ किया है कि फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कोई सर्वसम्मति या सामूहिक फरमान जारी नहीं किया गया है। हर निर्माता अपनी-अपनी उत्पादन लागत, प्रोडक्ट रेंज, मार्केट डिमांड और परिस्थितियों को देखते हुए स्वतंत्र रूप से कीमतें पुनरीक्षित करेगा। बैठक का मुख्य ध्येय लागत के प्रभाव को समझना और बाजार में बेहतर गुणवत्ता वाली साइकिलों की सप्लाई को बिना रुकावट जारी रखने के रास्तों की तलाश करना था।

हर तरफ से पड़ रही महंगाई की मार

बैठक में मौजूद उद्यमियों का कहना था कि साइकिल निर्माण की लागत सिर्फ स्टील से तय नहीं होती। फ्रेम और मैटेलिक पार्ट्स के अलावा टायर-ट्यूब, पेंट, केमिकल और छोटी-मोटी असेंबलिंग का खर्च भी सीधा जुड़ता है। जब एक साथ कई मोर्चों पर इनपुट कॉस्ट बढ़ जाए तो पुरानी दरों पर सप्लाई बनाए रखना किसी भी फैक्ट्री के लिए मुमकिन नहीं रह जाता।

एसोसिएशन के अध्यक्ष राजिंदर जिंदल, महासचिव रोहित पाहवा और समन्वयक उमेश नारंग ने संयुक्त रूप से कहा कि इस मुश्किल दौर में भी उद्योग उपभोक्ताओं के हितों और बाजार की जरूरतों को संतुलन में रखकर ही आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।

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