Mahendragarh News: हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ में गुरुवार को हरियाणा दिवस-2026 का आयोजन उत्साह एवं उल्लास के साथ किया गया। इस वर्ष आयोजन की थीम ‘हरियाणा एट 60: गौरवशाली विरासत, समृद्ध संस्कृति और विकसित भविष्य’ रही। विश्वविद्यालय के वंदे मातरम् सभागार में आयोजित कार्यक्रम में हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती तृप्ति श्योराण मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता कार्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने की। इस अवसर विश्वविद्यालय की प्रथम महिला प्रो. सुनीता श्रीवास्तव व जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेश गोयल भी उपस्थित रहे।
आयोजन में मुख्य अतिथि श्रीमती तृप्ति श्योराण ने अपने संबोधन में हरियाणा की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए बच्चों के अधिकारों के संरक्षण को एक महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समान अवसर और अपनी प्रतिभा के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध कराना आवश्यक है।
उन्होंने बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थानों की सामूहिक भूमिका पर बल दिया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने हरियाणा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरियाणा की पहचान उसकी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, गौरवशाली परंपराओं, जीवंत लोक संस्कृति और मेहनतकश लोगों से है। कृषि, खेल, शिक्षा, विज्ञान और उद्यमिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
उन्होंने कहा कि 60 वर्षों की यह विकास यात्रा हरियाणा के सामर्थ्य, संकल्प और निरंतर प्रगति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति प्रदेश की सबसे बड़ी पूंजी है और उनके कौशल, प्रतिभा एवं रचनात्मक क्षमता का सदुपयोग हरियाणा को विकास के नए आयामों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कुलपति ने विश्वविद्यालय की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय केवल उच्च शिक्षा और शोध का केंद्र ही नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय विकास के मूल्यों को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण संस्थान भी है। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों में अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति सम्मान, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
आयोजन में विश्वविद्यालय की एनएसएस इकाई की ‘उड़ान‘ योजना की वार्षिक रिपोर्ट का भी लोकार्पण किया तथा परिसर में कार्य कर रहे श्रमिकों के बच्चें, जो ‘उड़ान‘ के माध्यम से शिक्षा अर्जित कर रहे हैं, उनके साथ दीप दान एवं उनकी प्रगति का अवलोकन किया।
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