Mandi bank strike: यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर शुक्रवार को बैंक कर्मचारियों ने एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल की। मंडी-कुल्लू क्षेत्र के अलग-अलग बैंकों में काम करने वाले करीब 10 हजार अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए। हड़ताल के दौरान नेरचौक में बैंक कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने 5 डेज बैंकिंग लागू करने और पीएलआई स्कीम वापस लेने की मांग उठाई।
ऑल इंडिया बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन (AIBEA) के सर्कल सेक्रेटरी मंडी विजय कुमार ने कहा कि यह हड़ताल किसी के विरोध में नहीं है। बैंक कर्मचारी बेहतर कामकाजी माहौल, निजी जीवन में संतुलन, अच्छे स्वास्थ्य और लंबे समय तक बेहतर तरीके से काम करने की क्षमता की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैंक कर्मचारियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। स्टाफ की कमी, डिजिटल बैंकिंग से जुड़ा बढ़ता काम और मानसिक तनाव का असर कर्मचारियों के स्वास्थ्य और परिवार पर भी पड़ रहा है।
5 डेज बैंकिंग से तनाव कम होने का दावा
बैंक यूनियनों का कहना है कि 5 डेज बैंकिंग लागू होने से कर्मचारियों को काम और निजी जीवन के बीच बेहतर संतुलन बनाने का मौका मिलेगा। इससे मानसिक और शारीरिक तनाव कम होने के साथ काम करने की क्षमता भी बढ़ सकती है।
यूनियनों का यह भी कहना है कि कर्मचारियों के बेहतर स्वास्थ्य और कामकाजी परिस्थितियों का असर बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। उनके मुताबिक, बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस से बैंकिंग सेक्टर युवाओं के लिए ज्यादा आकर्षक करियर विकल्प बन सकता है।
पीएलआई स्कीम वापस लेने की भी मांग
हड़ताल के दौरान बैंक कर्मचारियों ने सरकार की पीएलआई स्कीम को भी मुद्दा बनाया। यूनियनों ने इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण बताते हुए वापस लेने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि पीएलआई स्कीम में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले बैंक यूनियनों के साथ बातचीत होनी चाहिए। इस मांग को लेकर भी प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी आवाज उठाई।
नेरचौक में हुए प्रदर्शन में AIBEA से विजय कुमार, लेखराज, हुकम चंद, विवेक चौधरी और काका राम समेत केंद्रीय समिति के सदस्य शामिल हुए। SBISA की ओर से विक्रम सिंह, टेक सिंह चौधरी और संतोष कुमार मौजूद रहे। वहीं SBIOA से मनोज कुमार, नरेश ठाकुर, विनय ठाकुर और लाल सिंह ठाकुर समेत कई अन्य बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। बैंक यूनियनों ने अपनी दोनों प्रमुख मांगों—5 डेज बैंकिंग और पीएलआई स्कीम में बदलाव से पहले कर्मचारियों के साथ बातचीत—को लेकर आगे भी दबाव बनाए रखने की बात कही।

