Mohali Court Drug Case : मोहाली कोर्ट ने पूर्व वायुसेना अधिकारी समेत दो को सुनाई 3 साल की सजा

मोहाली कोर्ट ने पूर्व वायुसेना अधिकारी समेत दो को सुनाई 3 साल की सजा
Mohali Court Drug Case : पंजाब के मोहाली में मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून (PMLA) की विशेष अदालत ने साल 2008 के कोकीन तस्करी मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश हरदीप सिंह की अदालत ने भारतीय वायुसेना के 80 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी दारा सिंह और उनके 77 वर्षीय सहयोगी गुरदर्शन सिंह को धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के आरोप में दोषी करार देते हुए 3-3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों दोषियों पर 5,000-5,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है।
यह मामला अगस्त 2008 का है, जब एसएएस नगर (मोहाली) पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दारा सिंह और गुरदर्शन सिंह को गिरफ्तार किया था। तलाशी के दौरान पुलिस ने दोनों के कब्जे से 1.23 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली कोकीन जब्त की थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपये बताई गई थी।
29 साल तक देश की सेवा, फिर ड्रग्स के काले कारोबार में फंसे दारा सिंह
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, आरोपी दारा सिंह भारतीय वायुसेना में करीब 29 वर्षों तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं और वे जूनियर वारंट ऑफिसर (JWO) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। पुलिस ने गिरफ्तारी के समय दारा सिंह के पास से दो बैंक चेक भी जब्त किए थे, जो उन्होंने कोकीन की खेप खरीदने के एवज में गुरदर्शन सिंह को जारी किए थे। इन दोनों चेकों की कुल राशि 10 लाख रुपये थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अक्टूबर 2019 में दोनों आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया था। इसके बाद जांच एजेंसी ने गहन छानबीन पूरी कर अक्टूबर 2022 में अदालत के समक्ष आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया। ईडी ने अदालत में दलील दी कि जब्त की गई कोकीन और सौदे के लिए दिए गए 10 लाख रुपये के चेक पूरी तरह से ‘अपराध से अर्जित आय’ (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का हिस्सा हैं।
कोर्ट ने खारिज की बचाव पक्ष की दलीलें
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने चेकों और लेनदेन को लेकर कई तर्क दिए, लेकिन अदालत ने उन्हें पूरी तरह से खारिज कर दिया। विशेष जज हरदीप सिंह ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपियों के बीच हुए लेनदेन से जुड़े चेक कानूनन अपराध से अर्जित आय ही माने जाएंगे। अदालत ने कहा कि साक्ष्यों से यह पूरी तरह सिद्ध होता है कि दोनों आरोपियों ने पीएमएलए की धारा 3 के तहत अपराध किया है, जो धारा 4 के अंतर्गत दंडनीय है।
अदालत ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि दोनों आरोपी पिछले 13 वर्षों से पुलिस केस में जमानत पर रहते हुए कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे थे। ऐसे में कानून के प्रावधानों के तहत उनके द्वारा पहले से काटी जा चुकी हिरासत की अवधि को उनकी कुल सजा में घटा दिया जाएगा (एडजस्ट कर दिया जाएगा)।
