Haryana Weather: हरियाणा के 15 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट, जानिए आपके शहर का हाल

हरियाणा के 15 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट
Haryana Weather: हरियाणा में मानसूनी हवाओं की वापसी से मौसम का मिजाज एक बार फिर बदल गया है। मौसम विभाग ने राज्य के 15 जिलों में तेज बारिश को लेकर ‘यलो अलर्ट’ जारी किया है। उत्तर और दक्षिण-पूर्वी इलाकों के पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, पानीपत, सोनीपत, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और पलवल में भारी बारिश की आशंका जताई गई है।
दूसरी ओर, पश्चिमी और मध्य हरियाणा के जिलों—सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, जींद और रोहतक में मौसम परिवर्तनशील रहेगा। इन इलाकों में हल्की बूंदाबांदी या मध्यम वर्षा की संभावना है। सोनीपत, हिसार और पानीपत समेत कई जिलों में शनिवार सुबह से ही काली घटाएं छाई हुई हैं।
मानसून टर्फ रेखा का असर, गुरुग्राम में जलभराव पर जेई निलंबित
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसूनी टर्फ रेखा इस समय श्री गंगानगर, रोहतक और फतेहगढ़ से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। इस मौसमी प्रणाली के चलते प्रदेश में 5 से 7 सितंबर तक लगातार तेज हवाओं के साथ बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी।
इससे पहले शुक्रवार को भी राज्य के सात जिलों में जमकर बादल बरसे। पंचकूला में सबसे ज्यादा 99 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि गुरुग्राम में महज एक घंटे की बारिश (36 एमएम) ने ही शहर की रफ्तार थाम दी। नेशनल हाईवे-48 पर डेढ़ घंटे तक गाड़ियों के पहिये थमे रहे। जलभराव के गंभीर हालात के दौरान फील्ड से गायब मिलने पर कड़ा संज्ञान लेते हुए जेई मनोज को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं सेक्टर-40 में बिजली की तारों पर भारी पेड़ और दो खंभे गिरने से दो कारें क्षतिग्रस्त हो गईं, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने मुस्तैदी दिखाते हुए बिजली की सप्लाई कटवाई।
तापमान में गिरावट, 8 सितंबर के बाद सुस्त पड़ेगा मानसून
झमाझम बारिश के चलते प्रदेश के औसतन दिन के तापमान में 1.6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। बीते 24 घंटों में सबसे कम न्यूनतम तापमान पंचकूला में 24.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सिरसा 36.5 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म रहा। कृषि विश्वविद्यालय हिसार के मौसम विभाग प्रमुख डॉ. मदन खीचड़ ने बताया कि बारिश के दौर से दिन के तापमान में कमी और रात में हल्की बढ़ोतरी होगी।
डॉ. खीचड़ के मुताबिक, 8 सितंबर के बाद प्रदेश में मानसून की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि जब तक बारिश का दौर जारी है, तब तक खेतों में सिंचाई और कीटनाशक का छिड़काव न करें और जल निकासी के पुख्ता इंतजाम रखें।
अगस्त में सामान्य से कम बरसे बादल, जिलों में दिखा भारी अंतर
मानसून के तीन महीने बीत जाने के बाद इस साल आंकड़ों में बड़ा असंतुलन नजर आ रहा है। अगस्त महीने में हरियाणा में 146.1 मिमी की सामान्य बारिश के मुकाबले केवल 135.4 मिमी ही पानी गिरा, जो बीते तीन सालों में सबसे कम है। 1 जून से 31 अगस्त के दौरान प्रदेश में कुल 283.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य आंकड़े (349.9 मिमी) से काफी कम है।
जिलों की बात करें तो भिवानी में सामान्य से 41%, पलवल में 26%, नूंह में 25% और गुरुग्राम में 17% अधिक बारिश दर्ज की गई। इसके ठीक उलट करनाल (-68%), जींद (-51%), कैथल (-49%) और अंबाला (-37%) जैसे जिलों में बारिश का भारी सूखा झेलना पड़ा है।
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