NEET Protest Jantar Mantar: देश भर में NEET पेपर लीक और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के खिलाफ युवाओं का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर देश के कोने-कोने से आए हजारों छात्र व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर लगातार डटे हुए हैं।
इस बीच, आंदोलन में शामिल अभ्यर्थियों का हौसला बढ़ाने के लिए पूर्वोत्तर के नागालैंड से एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने पूरे देश का दिल जीत लिया है। नागालैंड के रहने वाले डिएलही डिएनु नामक युवक ने दिल्ली से लगभग 2,000 किलोमीटर दूर रहते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के लिए भारी मात्रा में खाना भिजवाया।
डिएलही खुद इस आंदोलन का हिस्सा बनने दिल्ली नहीं आ सकते थे, लेकिन जब उन्होंने देखा कि हजारों साथी छात्र अपने भविष्य की लड़ाई के लिए सड़कों पर भूखे-प्यासे बैठे हैं, तो उनसे चुपचाप नहीं बैठा गया। उन्होंने तुरंत अपने मोबाइल से ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के जरिए डोमिनोज से 150 फार्महाउस चीज बर्स्ट पिज्जा का बड़ा ऑर्डर प्लेस कर दिया। टैक्स और डिलीवरी चार्ज जोड़कर यह बिल 67,734 रुपये तक पहुंच गया, जिसे डिएलही ने खुद अपनी जेब से चुकाया।
“जिसने खाना न खाया हो, उसे दे देना” — डिलीवरी एजेंट को दिया भावुक निर्देश
डिएलही ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए पूरा घटनाक्रम साझा किया। उन्होंने बताया कि यह ऑर्डर 22 जुलाई की शाम को दिया गया था। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने पिज्जा डिलीवरी के लिए जंतर-मंतर पर किसी खास व्यक्ति का नाम या संपर्क नंबर नहीं दिया था। जब डिलीवरी एजेंट ने फोन करके पूछा कि खाना किसे सौंपना है, तो डिएलही ने बेहद सादगी से कहा, “आप सीधे भीड़ के बीच जाइए और जिस किसी ने भी अभी तक खाना नहीं खाया है, उसे यह पिज्जा दे दीजिए।”
डिएलही के इस जवाब को सुनकर दूसरी तरफ मौजूद डिलीवरी पार्टनर भी भावुक हो गया। उसने भर्राई आवाज में कहा, “सर, इन भूखे छात्रों के लिए तो आप इस वक्त भगवान की तरह आए हैं।” डिएलही ने अपने पोस्ट में लिखा कि यह सुनकर वे खुद अपने आंसू नहीं रोक पाए। उन्हें लगा कि शायद उस डिलीवरी बॉय के घर में भी कोई पढ़ाई करने वाला भाई-बहन या बच्चा होगा, जो छात्रों के इस दर्द को अच्छे से समझ पा रहा था।
पूर्वोत्तर से दिल्ली तक गूंजा इंसानियत का पैगाम, बिल का स्क्रीनशॉट हुआ वायरल
अपने पोस्ट में डिएलही ने लिखा, “मैं भले ही भौगोलिक रूप से नागालैंड में बैठा हूं, लेकिन मेरा दिल और आत्मा जंतर-मंतर पर अपने हक की लड़ाई लड़ रहे उन बहादुर छात्रों के साथ है। जब वे अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, तो मैं घर पर आराम से खाना कैसे खा सकता था? मैं वहां पहुंच नहीं पाया, इसलिए बस यह छोटी सी कोशिश की।”
डिएलही ने अपने दावे के सबूत के तौर पर ऑर्डर की रसीद और बिल के स्क्रीनशॉट भी इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए हैं। देखते ही देखते यह पोस्ट इंटरनेट पर आग की तरह फैल गई। हजारों यूजर्स डिएलही की इस सहृदयता और इंसानियत की जमकर तारीफ कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि पूर्वोत्तर के इस युवक ने साबित कर दिया कि जब न्याय और छात्रों के भविष्य की बात आती है, तो पूरा देश एकजुट खड़ा नजर आता है।
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