Narnaul News: सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और फाइलों के बोझ तले दबने वाली आम जनता की फरियाद को सीधे प्रशासनिक मुखिया तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से सोमवार को एक अहम कवायद की गई। नारनौल के लघु सचिवालय परिसर में आयोजित ‘समाधान शिविर’ में इस बार भारी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। शिविर की कमान संभाल रहे अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) तरुण कुमार पावरिया ने बेहद संवेदनशीलता के साथ एक-एक कर कुल 128 नागरिकों की शिकायतों को न सिर्फ सुना, बल्कि मौके पर मौजूद संबंधित महकमों के आला अफसरों को त्वरित कार्रवाई के लिए जवाबदेह भी बनाया।
समाधान पोर्टल से कसी जा रही नकेल, बाबूशाही पर लगा अंकुश
शिविर की कार्यप्रणाली पर बात करते हुए अतिरिक्त उपायुक्त तरुण कुमार पावरिया ने बताया कि सरकार की इस विशेष पहल को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है। शिविर में दर्ज होने वाली हर छोटी-बड़ी शिकायत को बिना वक्त गंवाए सीधे ‘समाधान पोर्टल’ पर दर्ज (अपलोड) कर दिया जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि संबंधित विभाग ने उस शिकायत पर क्या एक्शन लिया और मामला कब तक सुलझा, इसकी अंतिम चरण तक कड़े स्तर पर ऑनलाइन निगरानी (मॉनिटरिंग) की जा सकती है। एडीसी ने कहा कि यह व्यवस्था आम जनता के लिए राहत का सबब बनी है, जिससे लोगों को क्लर्कों और दफ्तरों की परिक्रमा नहीं करनी पड़ती।
हफ्ते में दो दिन सीधे अफसरों से मिल सकती है जनता, प्रशासन ने जारी की अपील
एडीसी पावरिया ने आम जनता से इस लोक-कल्याणकारी योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी नागरिक को किसी विभाग, पेंशन, राशन या अन्य प्रशासनिक स्तर पर कोई समस्या आ रही है, तो वह बिना किसी झिझक के प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को अपने नजदीकी उपमंडल स्तर पर लगने वाले इन शिविरों में पहुंच सकता है। जिला प्रशासन आम जनता की हर जायज मांग और जनसमस्या का एक निश्चित समय सीमा के भीतर समाधान करने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है।
इन अधिकारियों की रही मुख्य मौजूदगी
फरियादियों की समस्याओं को मौके पर ही हल करने और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बिठाने के लिए इस दौरान पूरा प्रशासनिक अमला मुस्तैद नजर आया। शिविर में एडीसी के साथ एसडीएम नारनौल अनिरुद्ध यादव, डीएसपी भारत भूषण और सीटीएम डॉ. मंगल सेन मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इन अधिकारियों ने अलग-अलग विभागों से आए आवेदनों की समीक्षा की और कड़े निर्देश दिए कि जनता से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही या ढीला रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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