Narnaul News: हरियाणा सरकार प्राकृतिक आपदाओं से बागवानी फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना चला रही है। मुख्यमंत्री की इस पहल से किसानों को सब्जियों, फलों और मसालों की फसलों में आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को निर्धारित समय सीमा में अपनी फसल का पंजीकरण करवाना जरूरी है।
जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि बागवानी से संबंधित किसी भी योजना का लाभ लेने के लिए “मेरी फसल मेरा ब्योरा” पोर्टल fasal.haryana.gov.in पर फसल का पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। इसके बाद इच्छुक किसान बीमा योजना के लिए mbby.hortharyana.gov.in पर अपनी बागवानी फसलों का पंजीकरण करवा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि ओलावृष्टि, पाला, बाढ़, बादल फटना, आंधी-तूफान, आग, अधिक तापमान और सूखे जैसी आपदाओं से किसानों को अक्सर भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इस योजना के तहत फलों की खेती पर 50 हजार रुपये प्रति एकड़ तथा सब्जियों और मसालों पर 40 हजार रुपये प्रति एकड़ का बीमा किया जाएगा। इसके लिए किसान को फलों पर एक हजार रुपये प्रति एकड़ और सब्जियों व मसालों पर 800 रुपये प्रति एकड़ प्रीमियम देना होगा।
योजना में कुल 46 फसलें शामिल की गई हैं। सब्जियों में टमाटर, प्याज, आलू, फूलगोभी, मटर, गाजर, भिंडी, घीया, करेला, बैंगन, हरी मिर्च, शिमला मिर्च, पत्ता गोभी और मूली हैं। फलों में आम, किन्नू, बेर, लीची और अमरूद शामिल हैं, जबकि मसालों में हल्दी और लहसुन को योजना में रखा गया है।
बीमा क्लेम के निपटारे के लिए नुकसान का सर्वे करवाया जाएगा।
फसल का नुकसान 20 प्रतिशत से कम होने पर मुआवजा नहीं मिलेगा। 20 से 40 प्रतिशत नुकसान पर बीमित राशि का 25 प्रतिशत, 40 से 60 प्रतिशत पर 50 प्रतिशत, 60 से 80 प्रतिशत पर 75 प्रतिशत और 80 प्रतिशत से अधिक नुकसान पर बीमित राशि का 100 प्रतिशत मुआवजा दिया जाएगा।
पंजीकरण की अवधि फसलों के अनुसार अलग-अलग तय की गई है। लौकी, करेला, फूलगोभी, अमरूद, भिंडी, बैंगन, ककड़ी, टिंडा, तोरई, कद्दू, खीरा और अरबी का पंजीकरण 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक होगा। खरीफ प्याज का पंजीकरण 1 अगस्त से 25 सितंबर तक करवाया जा सकता है। बरसाती अमरूद के लिए 1 अप्रैल से 31 मई तथा शीतकालीन अमरूद और बेर के लिए 1 सितंबर से 31 अक्टूबर की अवधि तय है। ड्रैगन फ्रूट और हल्दी का पंजीकरण 1 मई से 31 जुलाई तक होगा।
अनार, माल्टा, नींबू, लेमन, संतरा, आंवला और किन्नू के लिए पंजीकरण 1 मार्च से 31 मई तक किया जा सकता है। आड़ू, नाशपाती, आलूबुखारा, जामुन, अंगूर, लीची, अंजीर, खजूर और आम के लिए 1 फरवरी से 31 मई की अवधि निर्धारित है। चीकू का पंजीकरण 1 सितंबर से 30 नवंबर तक और स्ट्रॉबेरी का 1 सितंबर से 31 जनवरी तक होगा। टमाटर, आलू, फूलगोभी, गाजर, पत्ता गोभी, मटर, मूली और लहसुन का पंजीकरण 15 सितंबर से 31 जनवरी तक करवाया जा सकता है।
रबी प्याज के लिए 15 दिसंबर से 31 जनवरी तथा जुकिनी के लिए 15 नवंबर से 31 जनवरी की अवधि तय है। भिंडी, लौकी, करेला, बैंगन, मिर्च, शिमला मिर्च, खरबूजा, तरबूज, ककड़ी, टिंडा, तोरई और कद्दू का पंजीकरण 15 जनवरी से 15 मार्च तक किया जा सकता है।
अधिकारी ने किसानों से अपील की कि वे निर्धारित अवधि में ही पंजीकरण करवाएं, क्योंकि समय सीमा के बाद पंजीकरण करवाने पर नुकसान की स्थिति में बीमा राशि नहीं मिलेगी। अधिक जानकारी के लिए किसी भी कार्यदिवस में जिला स्तर पर जिला उद्यान अधिकारी और ब्लॉक स्तर पर उद्यान विकास अधिकारी के कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।
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