Narnaul News: हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने महेंद्रगढ़ जिले में स्टोन क्रशर इकाइयों से फैल रहे वायु प्रदूषण पर नकेल कसने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। बोर्ड ने सभी क्रशर संचालकों को आगामी 1 नवंबर 2026 तक अनिवार्य रूप से प्रदूषण नियंत्रण उपकरण और आधुनिक निगरानी व्यवस्था स्थापित कर उन्हें प्रभावी रूप से चालू करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
नियमों की अनदेखी करने वाली इकाइयों के खिलाफ भारी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने से लेकर संचालन प्रतिबंधित करने तक की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसे लेकर हाल ही में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के महेंद्रगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय, नारनौल में क्षेत्रीय अधिकारी विकास ग्रेवाल की अध्यक्षता में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जिलेभर से आए स्टोन क्रशर इकाइयों के प्रतिनिधियों को वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े मानकों और नवीनतम दिशा-निर्देशों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की जुलाई 2023 की पर्यावरणीय मार्गदर्शिका, हरियाणा सरकार के 2 सितंबर 2025 के स्टोन क्रेशर संबंधी निर्देश और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के दिशा-निर्देश संख्या 103 के पूर्ण पालन पर विशेष जोर दिया गया।
क्षेत्रीय अधिकारी विकास ग्रेवाल ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक क्रशर इकाई को इन दिशा-निर्देशों के साथ-साथ संचालन की सहमति (Consent to Operate) में दर्ज सभी शर्तों का कड़ाई से पालन करना होगा। धूल के उड़ने और उसके उत्सर्जन को रोकने के लिए जरूरी उपकरण लगाने के साथ ही उन्हें नियमित रूप से चालू रखना भी अनिवार्य है।
आयोग के निर्देशों के तहत इकाइयों में निगरानी के लिए आधुनिक कैमरा प्रणाली, पीएम 2.5 और पीएम 10 सेंसर तथा वाहनों के पहियों की सफाई के लिए ऑटोमैटिक व्हील वॉशिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं स्थापित करनी होंगी।
प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं 1 नवंबर 2026 तक धरातल पर उतर जानी चाहिए। क्रशर संचालकों को अनुपालन के प्रमाण के तौर पर सभी संबंधित दस्तावेज और सही तारीख व समय दर्शाने वाली जियो-टैग (भौगोलिक स्थिति वाली) तस्वीरें क्षेत्रीय कार्यालय में जमा करानी होंगी।
क्षेत्रीय अधिकारी ने चेतावनी दी है कि तय मानकों का पालन न करने वाली इकाइयों को बख्शा नहीं जाएगा। नियमों के उल्लंघन पर कारण बताओ नोटिस जारी करने, भारी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने और इकाई का संचालन पूरी तरह से बंद करने जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा, सक्षम प्राधिकारी के आदेश पर ऐसी इकाइयों की बिजली और पानी की आपूर्ति भी काट दी जाएगी। बोर्ड ने सभी संचालकों से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने और समय-सीमा के भीतर प्रदूषण नियंत्रण उपाय लागू करने की अपील की है।
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