September 5, 2026

Nepal Flood Rescue: घर में ही मलबे में 11 दिन दबी रही 64 साल की चंद्रिका, नेपाल में रेस्क्यू टीम ने जिंदा निकाला

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Nepal Flood Rescue: घर में ही मलबे में 11 दिन दबी रही 64 साल की चंद्रिका, नेपाल में रेस्क्यू टीम ने जिंदा निकाला

घर में ही मलबे में 11 दिन दबी रही 64 साल की चंद्रिका

Nepal Flood Rescue: नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के बाद जारी रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान शनिवार को नुवाकोट में एक महिला को 11 दिन बाद जिंदा निकाला गया। 64 वर्षीय चंद्रिका श्रेष्ठ अपने टूटे हुए घर के मलबे में दबी हुई थीं और रेस्क्यू टीम ने उन्हें बेहोशी की हालत में बाहर निकाला। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद से लगातार राहत और बचाव अभियान चल रहा है। लगातार मलबा हटाने और सुरंगों की तलाशी के बीच बचाव दलों को अब भी कुछ लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीद है।

 

तीन भारतीयों का भी रेस्क्यू, 169 तक पहुंचा आंकड़ा

नुवाकोट के त्रिशूली बाजार इलाके से 5 साल के बच्चे समेत तीन भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला गया है। ताजा जानकारी के मुताबिक, नेपाल में अब तक 169 भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि 275 भारतीय अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत और नेपाल की सरकारें लगातार संपर्क में हैं। भारत ने राहत अभियान में सहायता के लिए लगभग 95 टन राहत सामग्री भी नेपाल भेजी है और बचाव कार्य में विशेषज्ञ टीमों की मदद उपलब्ध कराई है।

 

सुरंग से चीनी नागरिक को भी जिंदा निकाला

नेपाल सेना की रेस्क्यू टीम ने अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से एक चीनी नागरिक को भी सुरक्षित बाहर निकाला। वह भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद सुरंग के अंदर फंस गया था। रेस्क्यू अभियान 216 मेगावाट के अपर त्रिशूली-1 प्रोजेक्ट की ऑडिट-4 सुरंग में चलाया गया। इसमें नेपाल सेना के साथ दक्षिण कोरिया के आपदा विशेषज्ञ भी शामिल रहे। बाहर निकालने के बाद चीनी नागरिक को इलाज और आगे की मदद के लिए नुवाकोट के त्रिशूली स्थित मैथिल बैरक ले जाया गया। इससे पहले भी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों से फंसे लोगों को जिंदा निकाला गया है। शुक्रवार को दो नेपाली श्रमिकों को त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया था।

 

भट्टार में पहाड़ से मिट्टी-पत्थर गिरने के बाद फिर बढ़ी चिंता

नेपाल के भट्टार इलाके में शुक्रवार को पहाड़ से मिट्टी और पत्थर गिरने के कारण नदी का रास्ता कुछ देर के लिए प्रभावित हुआ था। इससे नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा होने की चिंता बढ़ गई थी। हालांकि शनिवार को नदी का बहाव सामान्य रहा। जिला अधिकारी बार्टराज पौडेल के अनुसार पानी के स्तर में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ और नदी का रास्ता भी बंद नहीं हुआ। पहाड़ से मिट्टी-पत्थर गिरने की घटना भी रुक गई है और फिलहाल कोई नया खतरा सामने नहीं आया है। सुरक्षा को देखते हुए शुक्रवार को आठ परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया था। प्रशासन के अनुसार इस घटना में किसी इंसान या पशु की मौत नहीं हुई।

 

नेपाल में 1300 से ज्यादा मौतें, 5000 से अधिक लापता

नेपाल में आपदा के बाद मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। नवीनतम रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 1,344 बताई गई है, जबकि करीब 5,000 लोग अभी भी लापता हैं। 12 हजार से ज्यादा लोगों को अब तक सुरक्षित निकाला जा चुका है। इस आपदा से 32 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बड़ी संख्या में स्कूल-कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को नुकसान पहुंचा है, जिससे 6,500 से ज्यादा विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ में चार स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह और तीन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। करीब 55 किलोमीटर सड़कें पूरी तरह टूट गईं, जबकि 37 मोटरेबल ब्रिज और 68 झूला पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।

 

सांसद अर्जुन नरसिंह केसी ने उठाए राहत व्यवस्था पर सवाल

नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद अर्जुन नरसिंह केसी ने राहत और बचाव अभियान की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू और राहत कार्यों में पर्याप्त तालमेल तथा लंबी अवधि की योजना की कमी दिखाई दी।

केसी के मुताबिक, इस आपदा से 800 अरब नेपाली रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है। उन्होंने सरकार पर आपदा के बाद जरूरतों का आकलन जल्द शुरू नहीं करने का आरोप लगाया।

उन्होंने जलवायु परिवर्तन से प्रभावित देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्लाइमेट जस्टिस और मुआवजे की मांग उठाने की बात भी कही। उनके अनुसार, इस आपदा ने जलवायु असमानता से जुड़ा सवाल फिर सामने ला दिया है।

 

सड़क, पुल और स्वास्थ्य व्यवस्था को भारी नुकसान

नेपाल में बाढ़ का असर केवल लोगों की जान पर ही नहीं पड़ा, बल्कि परिवहन और स्वास्थ्य ढांचे पर भी गंभीर असर हुआ है। सड़कें टूटने और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से कई प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाना चुनौती बना हुआ है। शैक्षणिक संस्थानों को हुए नुकसान का असर हजारों विद्यार्थियों पर पड़ा है। वहीं स्वास्थ्य केंद्रों के क्षतिग्रस्त होने से आपदा प्रभावित लोगों को इलाज उपलब्ध कराने की चुनौती भी बढ़ गई है।

 

आम लोगों के लिए क्या बड़ी चिंता है?

रेस्क्यू अभियान के 11वें दिन भी लोगों का जिंदा मिलना राहत की उम्मीद बनाए रखता है, लेकिन हजारों लोगों के लापता होने से खोज अभियान की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। पहाड़ी इलाकों में मलबा, क्षतिग्रस्त सड़कें और सुरंगों तक पहुंच की मुश्किलें बचाव कार्य को धीमा कर रही हैं।
भारत समेत कई देशों की विशेषज्ञ टीमें नेपाल के राहत और बचाव अभियान में सहयोग कर रही हैं। अब प्रशासन का फोकस एक तरफ लापता लोगों की तलाश पर है, वहीं दूसरी तरफ सड़क, पुल, स्वास्थ्य केंद्र और दूसरी जरूरी सुविधाओं को बहाल करने पर भी है।

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