Haryana News: धान-गेहूं छोड़िए और पाइए ₹8000 प्रति एकड़, हरियाणा सरकार की नई कृषि नीति का ऐलान
गाय खरीदने पर ₹30,000 की सब्सिडी, मोरनी के किसानों को कंपनियों से मिलेगा 10% ज्यादा भाव
Haryana News: हरियाणा की कृषि नीति अब एक बड़े करवट की तैयारी में है। पारंपरिक तौर पर धान और गेहूं की खेती के गढ़ रहे इस राज्य में सरकार अब किसानों को लीक से हटाकर बागवानी, प्राकृतिक खेती और वैल्यू एडिशन की आधुनिक राह पर ले जाने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं धरातल पर उतारने जा रही है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के ताजा बयानों से साफ है कि सरकार अब सिर्फ फसल उगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग की पूरी चेन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
किन्नू-लीची के लगेंगे चार नए एक्सीलेंस सेंटर, सिरसा के मॉडल को आगे बढ़ाने की तैयारी
इस नई रणनीति का सबसे मजबूत स्तंभ बागवानी क्षेत्र को बनाया जा रहा है। सिरसा के किन्नू को जीआई (GI) टैग मिलने के बाद जिस तरह वैश्विक बाजार में उसे नई पहचान मिली है, उसी सफलता को अब राज्य के अन्य हिस्सों में भी दोहराने की तैयारी है।
किसानों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तौर-तरीकों से प्रशिक्षित करने के लिए प्रदेश में चार नए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित किए जाएंगे। इन सेंटरों पर मुख्य रूप से किन्नू, लीची, स्ट्रॉबेरी और अमरूद की उन्नत किस्मों पर काम होगा, जहां किसानों को न सिर्फ उच्च गुणवत्ता वाले पौधे मिलेंगे, बल्कि सीधे कृषि विशेषज्ञों की देखरेख में नई तकनीक सीखने का मौका मिलेगा।
धान छोड़ो, इनाम पाओ: वैकल्पिक फसलों पर ₹8000 की मदद
भूजल स्तर को बचाने और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए सरकार ने एक बड़ा दांव खेला है। जो किसान इस बार धान की पारंपरिक खेती को छोड़कर वैकल्पिक फसलों (दलहन, तिलहन या बागवानी) का रुख करेंगे, उन्हें सरकार की ओर से ₹8,000 प्रति एकड़ की मोटी प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
इसके साथ ही, पर्यावरण के लिए सिरदर्द बन चुके पराली प्रबंधन की समस्या से निपटने के लिए भी ₹500 प्रति एकड़ की अतिरिक्त सहायता का प्रावधान किया गया है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि किसानों की खेती की लागत घटेगी और वे पराली को आर्थिक रूप से उपयोगी बना सकेंगे।
गाय खरीदने पर 30 हजार की सब्सिडी, बाजार से 10% ज्यादा भाव की गारंटी
प्राकृतिक खेती (नेचुरल फार्मिंग) को राज्य में आंदोलन का रूप देने के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से एक विशेष बजट तैयार किया गया है। शुरुआत में प्रदेश की करीब दो हजार एकड़ भूमि को इस दायरे में लाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। योजना को व्यावहारिक बनाने के लिए किसानों को पंचायती और कृषि भूमि 10 साल की लंबी लीज पर दी जाएगी।
यही नहीं, प्राकृतिक खेती के लिए सबसे जरूरी देसी गाय की खरीद पर सरकार ₹30,000 तक की सब्सिडी मुहैया कराएगी। पंचकुला के मोरनी ब्लॉक में तो एक ऐसा अनूठा मॉडल तैयार किया गया है, जहां निजी कंपनियां सीधे किसानों के खेतों से प्राकृतिक उत्पाद खरीदेंगी और किसानों को मौजूदा बाजार मूल्य से 10 प्रतिशत अधिक का प्रीमियम भाव मिलेगा।
गन्नौर में आकार ले रही एशिया की सबसे बड़ी मंडी, एफपीओ को 80 फीसदी सब्सिडी
किसानों की सबसे बड़ी चिंता फसल बेचने और उसे सुरक्षित रखने की होती है। इस दिशा में गन्नौर में निर्माणाधीन एशिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय फल एवं सब्जी मंडी गेम-चेंजर साबित होने वाली है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस अत्याधुनिक मंडी में वातानुकूलित (AC) शेड, विशाल कोल्ड स्टोरेज और वैश्विक स्तर की विपणन प्रणालियां होंगी।
इसके अलावा, गांवों के स्तर पर कोल्ड चेन और भंडारण नेटवर्क को मजबूत करने के लिए किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को बुनियादी ढांचा तैयार करने पर 80 प्रतिशत तक की भारी-भरकम सब्सिडी दी जा रही है। सरकार का यह चौतरफा प्रयास यदि जमीन पर पूरी तरह कामयाब रहा, तो आने वाले दिनों में हरियाणा के किसानों की तकदीर और तस्वीर दोनों बदली नजर आएगी।
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