ASHA Workers Protest: धर्मशाला में आशा वर्करों का ₹18 हजार मासिक मानदेय की मांग को लकर प्रदर्शन, 2 घंटे तक ट्रैफिक प्रभावित
धर्मशाला में आशा वर्करों प्रदर्शन
ASHA Workers Protest: हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में आज यानी गुरुवार को भारतीय मजदूर संघ (BMS) के बैनर तले प्रदेशभर से पहुंचीं आशा वर्करों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर बड़ा प्रदर्शन किया। हजारों आशा कार्यकर्ता रैली निकालते हुए डीसी कार्यालय पहुंचीं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के चलते कलेक्ट्रेट मार्ग पर करीब दो घंटे तक यातायात प्रभावित रहा, जिससे आम लोगों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शन में शामिल आशा वर्करों ने सरकार से स्वास्थ्य विभाग में नियमित कर्मचारी का दर्जा देने और नियमितीकरण होने तक कम से कम 18 हजार रुपये मासिक निश्चित मानदेय देने की मांग दोहराई। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि लंबे समय से आशा वर्करों की मांगों की अनदेखी की जा रही है।
‘स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं आशा वर्कर’
भारतीय मजदूर संघ के प्रांतीय पदाधिकारियों ने कहा कि आशा कार्यकर्ता वर्षों से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे अहम कड़ी बनी हुई हैं। कोरोना महामारी से लेकर टीकाकरण अभियान और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के विभिन्न कार्यक्रमों को सफल बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
संघ के मुख्य सचिव ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण कार्य करने के बावजूद आशा वर्करों को बहुत कम प्रोत्साहन राशि पर काम करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि सरकार उन्हें मानदेय कर्मी मानकर न्यूनतम वेतन संबंधी प्रावधानों का लाभ नहीं दे रही, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपा 7 सूत्रीय मांग पत्र
प्रदर्शन के बाद आशा वर्करों का एक प्रतिनिधिमंडल जिला कलेक्टर से मिला। इस दौरान मुख्यमंत्री के नाम सात सूत्रीय मांग पत्र सौंपकर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि आगामी बजट सत्र से पहले उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाओं का बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
इन मांगों पर सरकार से फैसले की उम्मीद
आशा वर्करों ने मांग की कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग में नियमित सरकारी कर्मचारी बनाया जाए। जब तक नियमितीकरण नहीं होता, तब तक कम से कम 18 हजार रुपये मासिक निश्चित मानदेय दिया जाए। इसके अलावा ईपीएफ, ईएसआई, सरकारी मुफ्त चिकित्सा सुविधा, जीवन बीमा और कार्य के निश्चित घंटे तय करने की भी मांग उठाई गई। उनका कहना है कि वर्तमान में उन्हें लगभग पूरे दिन विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं, जबकि इसके अनुरूप सुविधाएं और आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं है।
भारतीय मजदूर संघ ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने बजट सत्र से पहले उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया तो आंदोलन को पूरे हिमाचल प्रदेश में और व्यापक किया जाएगा। संघ का कहना है कि आशा वर्कर स्वास्थ्य सेवाओं की पहली कड़ी हैं और उनकी समस्याओं का समाधान किए बिना ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत नहीं किया जा सकता।
