Himachal Pradesh News: कुल्लू में प्रसूता की मौत पर फिर सड़कों पर उतरे लोग, एसपी कार्यालय का किया घेराव, डॉक्टरों पर FIR की मांग
एसपी कार्यालय का किया घेराव, डॉक्टरों पर FIR की मांग
Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला अस्पताल में प्रसूता मंजू शर्मा की मौत के मामले में बुधवार को लोगों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। ढालपुर मैदान में आयोजित धरने के बाद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एसपी कार्यालय पहुंचे और डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। बारिश के बावजूद लोग बड़ी संख्या में धरने में शामिल हुए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। एसपी कार्यालय के बाहर सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शनकारियों को मुख्य प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया गया, जिसके बाद वहीं धरना जारी रहा।
परिजनों ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग दोहराई
धरने को संबोधित करते हुए बंटी सराजी, सुमित कुमार और संजय चौहान ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले से जुड़े उनके सोशल मीडिया अकाउंट भी बंद किए गए, जिस पर उन्होंने आपत्ति जताई। मंजू शर्मा के पति और अन्य परिजनों ने भी मंच से अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला है। उन्होंने मांग की कि मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
एसपी बोले- जांच जारी है, स्वास्थ्य निदेशक को भेजा गया पत्र
प्रदर्शन के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने एसपी मदन कुमार से मुलाकात की। इस दौरान बंटी सराजी ने आरोप लगाया कि साइबर सेल के माध्यम से उन्हें दबाने का प्रयास किया जा रहा है। एसपी मदन कुमार ने बताया कि डॉक्टरों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है और स्वास्थ्य निदेशक को भी पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पूरे मामले की जांच कर रहे हैं और जांच पूरी होने के बाद ही तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टरों पर एफआईआर नहीं होने पर उठाए सवाल
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि घटना के 15 दिन बीत जाने के बावजूद डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई, जबकि उनके खिलाफ कुछ ही समय में मामला दर्ज कर लिया गया। उन्होंने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मामले की जांच जिला अस्पताल के डॉक्टरों से नहीं कराई जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या बाहरी मेडिकल विशेषज्ञों के पैनल से कराई जाए, ताकि जांच निष्पक्ष हो और सभी पक्षों के तथ्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके।
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