Indri News: एक पौधा धरती मां के नाम, इन्द्री के योग साधकों ने लिया 100 पौधों को पेड़ बनाने तक पालने का जिम्मा
एक पौधा धरती मां के नाम
Indri News: बढ़ते कंक्रीट के जंगलों और अनियोजित विकास के बीच झुलसती जा रही धरती को हरी चुनर ओढ़ाने की एक बेहद खूबसूरत और अनुकरणीय कोशिश इन्द्री में देखने को मिली। जनसंख्या दिवस के उपलक्ष्य पर पतंजलि योगशाला के योग साधकों ने ‘एक पौधा धरती मां के नाम’ मुहिम के तहत शहर के विभिन्न हिस्सों में 100 से अधिक पौधों का रोपण किया। इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि यह महज एक दिन की रस्म अदायगी या फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें शामिल हर एक साधक ने पौधों को तब तक पालने का जिम्मा उठाया, जब तक कि वे एक विशाल वृक्ष का रूप न ले लें।
लगातार तीसरे साल लगा ‘हरित शतक’, समाज के लिए बनी नजीर
यह पहला मौका नहीं है जब योगशाला के साधक सड़कों और पार्कों में कुदाल थामे नजर आए हों। संस्था ने लगातार तीसरे साल कम से कम 100 पौधे लगाने और उनकी शत-प्रतिशत उत्तरजीविता (Survival) सुनिश्चित करने का अपना संकल्प पूरा किया है। स्थानीय बाशिंदों ने इस निरंतरता की तारीफ करते हुए कहा कि जब अधिकांश सरकारी और गैर-सरकारी वृक्षारोपण अभियान फाइलों और तस्वीरों में दम तोड़ देते हैं, ऐसे में पतंजलि योगशाला का यह जमीनी प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सच्ची प्रेरणा है।
इस रोपण अभियान को सफल बनाने में प्रिंस खन्ना, कपिल बंसल, प्रियंका, पायल, राज कुमार, बलजीत, शिवम गोयल, विपिन गोयल, सीमा गोयल, संदीप और सोनिया कांबोज सहित बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमियों और योग साधकों ने पसीना बहाया।
सांसों पर मंडरा रहा है संकट: योग और शुद्ध वायु का सीधा नाता
पौधारोपण के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए योग शिक्षक नितिन गांधी ने प्रदेश की भौगोलिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “हरियाणा में वन क्षेत्र का दायरा लगातार सिमट रहा है, जो हमारे और हमारी आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरे का संकेत है। औद्योगीकरण और शहरीकरण की अंधी दौड़ में हम यह भूलते जा रहे हैं कि जिस हवा में हम सांस ले रहे हैं, उसे शुद्ध करने का कोई कृत्रिम कारखाना नहीं है। यदि हम आज नहीं जागे, तो कल योग और प्राणायाम करने के लिए भी हमें शुद्ध ऑक्सीजन नसीब नहीं होगी।”
नितिन गांधी ने वैज्ञानिक तथ्यों का हवाला देते हुए समझाया कि एक विकसित वृक्ष न केवल ऑक्सीजन का सबसे बड़ा प्राकृतिक कारखाना है, बल्कि वह वातावरण से जहरीली कार्बन डाइऑक्साइड और धूल के कणों को सोखकर एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। तापमान के बढ़ते पारे और बिगड़ते वर्षा चक्र को अगर कोई रोक सकता है, तो वह सिर्फ और सिर्फ पेड़ ही हैं।
उत्सवों को प्रकृति से जोड़ें: हर खास मौके पर लगाएं एक पेड़
कार्यक्रम के समापन पर योग शिक्षक ने समाज के सोचने के तरीके में बदलाव लाने की वकालत की। उन्होंने अपील की कि लोग अपने जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों—जैसे बच्चों के जन्मदिन, शादी की सालगिरह या किसी प्रियजन की स्मृति में—होटलों या फिजूलखर्ची में पैसे बहाने के बजाय कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं। उन्होंने कहा कि यदि पौधारोपण हमारे पारिवारिक संस्कारों का हिस्सा बन जाए, तो देश के हरित क्षेत्र को दोबारा समृद्ध होने से कोई नहीं रोक सकता। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने हाथ जोड़कर प्रकृति की रक्षा करने और इस अभियान को एक व्यापक जनआंदोलन का रूप देने का सामूहिक संकल्प लिया।
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