Dragon Fruit Story: मेक्सिको के रेगिस्तान से भारत के खेतों तक, जानिए ड्रैगन फ्रूट के ‘कमलम’ बनने की पूरी कहानी
कभी ₹400 किलो बिकने वाला विदेशी ड्रैगन फ्रूट अब क्यों हुआ इतना सस्ता
Dragon Fruit Story: आज भारत के किसी भी फल बाजार या सुपरमार्केट में चले जाइए, गुलाबी रंग का एक अजीबोगरीब फल आपको अपनी तरफ जरूर आकर्षित करेगा। इसे हम और आप ‘ड्रैगन फ्रूट’ के नाम से जानते हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फल का मूल निवास स्थान मध्य अमेरिका और मेक्सिको के तपते हुए रेगिस्तान हैं। वहां की स्थानीय भाषा में इसे ‘पिटाया’ (Pitaya) कहा जाता था। 19वीं सदी में जब फ्रांसीसी औपनिवेशिक शासक इस पौधे को वियतनाम ले गए, तो वहां के किसानों ने इसके रूप-रंग को देखकर इसका नाम ‘थान लॉन्ग’ रख दिया, जिसका अंग्रेजी मतलब होता है—ड्रैगन फ्रूट। दरअसल, इसकी चमकीली गुलाबी त्वचा पर जो हरे रंग के नुकीले उभार होते हैं, वे पौराणिक कहानियों के ड्रैगन की खाल जैसे दिखते हैं। भारत में जब इसकी लोकप्रियता बढ़ी, तो इसके कमल जैसे आकार को देखते हुए सरकार ने इसका आधिकारिक नाम ‘कमलम’ रख दिया।
क्यों आसमान छूते थे इसके दाम और अब कैसे आई भारी गिरावट?
एक वक्त था जब भारत में ड्रैगन फ्रूट देखना भी दुर्लभ था। यह पूरी तरह से वियतनाम और अन्य देशों से हवाई जहाज के जरिए आयात किया जाता था। भारी-भरकम टैक्स और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट की वजह से बाजारों में इसकी कीमत ₹300 से ₹400 प्रति किलो से कम नहीं होती थी। इसके अलावा, इस फसल के साथ एक तकनीकी चुनौती भी है। इसके कैक्टस प्रजाति के पौधे को सहारा देने के लिए खेतों में कंक्रीट के खंभे और लोहे के रिंग लगाने पड़ते हैं, जिसमें शुरुआती लागत बहुत ज्यादा आती है। साथ ही, पौधे लगाने के बाद फल आने में कम से कम एक से दो साल का वक्त लगता है।
लेकिन अब भारतीय कृषि ने इस समीकरण को बदल दिया है। गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश के प्रगतिशील किसानों ने इसकी तकनीक को समझा और भारत की मिट्टी में ही इसका बंपर उत्पादन शुरू कर दिया। घरेलू पैदावार बढ़ने का सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिला है और जो फल कभी कौतूहल का विषय था, वह अब ₹80 से ₹250 प्रति किलो के बेहद वाजिब दाम पर हर आम-ओ-खास के लिए उपलब्ध है।
प्लेटलेट्स का पावरहाउस और बीमारियों के खिलाफ अचूक हथियार
चिकित्सा जगत में ड्रैगन फ्रूट को एक ‘सुपरफूड’ का दर्जा हासिल है। खासकर मानसून और उसके बाद के सीजन में जब देश में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का प्रकोप बढ़ता है, तब इस फल की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह खून में तेजी से गिरते प्लेटलेट्स काउंट को रिकवर करने में अद्भुत भूमिका निभाता है। इसके अलावा, इसके भीतर छिपे स्वास्थ्य लाभों की सूची लंबी है:
मजबूत इम्यूनिटी: इसमें संतरे की तरह प्रचुर मात्रा में विटामिन-सी होता है, जो मौसमी संक्रमण, सर्दी और खांसी से शरीर की रक्षा करता है।
शुगर-बीपी पर लगाम: इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बेहद कम होता है, जिसका सीधा मतलब है कि इसे खाने से खून में शुगर अचानक नहीं बढ़ती। यही वजह है कि यह डायबिटीज के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
पाचन तंत्र का दोस्त: इस फल के गूदे में मौजूद छोटे-छोटे काले बीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड और भारी मात्रा में डाइटरी फाइबर होता है, जो पुरानी से पुरानी कब्ज की समस्या को जड़ से खत्म कर देता है।
आज के इस डिजिटल दौर में आपको इस फल को ढूंढने के लिए धूप में बाहर निकलने की भी जरूरत नहीं है। बिगबास्केट, जियोमार्ट या जेप्टो जैसे ग्रोसरी ऐप्स पर क्लिक करके आप इसे चंद मिनटों में अपने घर पर मंगवा सकते हैं। सादगी, स्वाद और सेहत का यह अनोखा संगम वाकई बेमिसाल है।
